The Real Story of Horror, Most Real - Life Ghost Stories From Real People, Real Life Events, These Horror Stories Aren't For The Faint of Heart, Comedy Horror stories & Other Funny Story

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Friday, January 10, 2020

January 10, 2020

उलझे बालों वाली लड़की

उलझे बालों वाली लड़की का रहस्यम कहानी :- The mysterious story of a girl with tangled hair.





वैभव जो 26 साल का है उसकी अभी अभी नयी शादी हुई है और उसकी एक खूबसूरत सी बीवी भी है। ,  ये दोनों हनीमून बनाने हिमाचल गए थे जहाँ उन्होंने 4 दिन गुजारे। अब उनके दिल्ली अपने घर वापस आने का समय हो गया था। दोनों अपनी गाड़ी में बैठ गए और दिल्ली के लिए चल दिए।  रात के 11 बज गए थे अब वो हिमाचल की घाटी को पार करने ही वाले थे। रोड बिलकुल सुनसान थी और गाडी बिलकुल तेज़ी में जा रही थी ।




 अचानक वैभव को अपनी गाड़ी के आगे एक औरत दिखी जिसने लाल रंग की साड़ी पहनी थी। वो दूर से ही हाथ हिला कर गाडी को रोक रही थी।   उसको देख कर वैभव की बीवी ने उसे गाडी रोकने से मना कर दिया क्योंकि उसको डर था की ये कोई लूट पाट करने की चाल हो सकती है।  लेकिन वो औरत गाड़ी के सामने आगई जिससे वैभव को गाडी रोकनी पड़ी। वो औरत ज़ोर ज़ोर से दरवाज़े को पीटने लगी उसके चेहरे के हाव भाव से ऐसा लग रहा था जैसे वो किसी बड़ी मुसीबत में हो।,   वैभव की बीवी ने उसे गाडी का दरवाज़ खोलने से मना कर दिया उसने कहा कि ये कोई चाल हो सकती है हमें बहार नहीं जाना चाहिए ।  पर वैभव ने बोला की अगर सच में ये किसी मुसीबत में होगी तो और उसे हमारी जरुरत हो क्योंकि उसको देख कर वो अच्छे खासे घर की लग रही थी। ये बोलते ही वैभव ने गाडी का दरवाज़ा खोल दिया और बाहर आ गया।


 वो औरत घबराते हुए बोली ” प्लीज, मेरी मदद करो “। वैभव ने बोला क्या हुआ है।उस औरत ने जवाब दिया की ” मेरी गाड़ी नीचे खाई में गिर कर एक पेड़ से टकरा गई है और उसमें मेरी छोटी सी बच्ची फसी हुई है। प्लीज उसको बाहर निकालो ” ,  ये सुनते ही वैभव की बीवी भी बाहर आगई और तीनों खाई की और भागे। उन्होंने देखा की वो गाडी थोड़ी नीचे एक पेड़ से टकराई हुई है। वैभव झट से नीचे की और गया। उसने देखा की पीछे वाली सीट पर एक बच्ची बैठी है  जो रो रही है। वैभव ने दरवाज़ा खोलना चाहा पर वो नहीं खुला। दरवाज़ा अटका हुआ था। उसने बोहोत कोशिश की तब जा कर वो दरवाज़ा खुला।



वैभव ने उस लड़की को बहार निकाल कर अपनी गोदी में रख लिया।  पर लड़की अभी भी रोए जा रही थी और मम्मी मम्मी कर रहा थी। तभी वैभव की नज़र आगे वाली ड्राइविंग सीट पर गयी जहाँ उसे कोई बैठा हुआ लगा। लेकिन आगे वाली गाडी का शीशा धुंधला था तो साफ़ नज़र नहीं आरहा था।  उसने अपने कपडे से उसे साफ़ किया । और जो वैभव ने देखा उसे देख कर उसकी पैरो तले ज़मीन ही खिसक गई। उसको विश्वास ही नहीं हो रहा था। ,  उसने देखा की आगे वाली सीट पर और कोई नहीं उस बच्ची की माँ थी जो मदद के लिए वैभव को बुला रही थी। उसने देखा की वो औरत के माथे से खून निकल रहा है और उसकी मौत हो चुकी है।


 वैभव की पत्नी ने वैभव की हालत देख कर झट से उसके पास आई और वो भी ये मंजर देख कर हैरान हो गयी ।ये देखते ही वैभव और उसकी पत्नी ने पीछे की और देखा जहाँ वो औरत खड़ी थी पर वहाँ अब कोई नहीं था।

Thursday, January 9, 2020

January 09, 2020

जब मुझे अनजान नंबर से आई कॉल

उस वक़्त मेरे पास नोकिया का हैंडसेट मोबाइल हुआ करता था। जो हमेशा साइलेंट मोड़ पर ही रहता था। 

At that time, I used to have a Nokia handset mobile. Who was always on silent turn.




बात आज से करीब छह साल पहले कि है। उस वक़्त मेरे पास नोकिया का हैंडसेट मोबाइल हुआ करता था। जो हमेशा साइलेंट मोड़ पर ही रहता था। क्योंकि उस वक़्त मैं बारहवीं में थी और सहेलियों से जीवन भरा था। हर वक़्त कोई न कोई सहेली का मिस्ड कॉल या कॉल आ ही जाता था। मेरे पिता नाराज़ हो जाते थे।


ऐसे ही एक दिन की बात है। मैं बस में बैठकर कॉलेज जा रही थी। और मेरा फ़ोन मेरे हाथ में ही था। तभी अचानक फ़ोन वाइब्रेट मोड़ पर बजने लगा। वाइब्रेशन मोड़ की मुझे आदत नहीं थी, इसलिए अचानक हुए इस हरकत से मैं घबरा गयी और फ़ोन छूटकर हाथ से नीचे गिर गया। और सिर्फ़ नीचे ही नहीं गिरा फ़ोन उछलकर बस से नीचे जा गिरा। क्योंकि मैं दरवाज़े के पास वाले सीट पर ही बैठी थी।


ख़ैर कंडक्टर जी अच्छे थे। उन्होंने जल्दी ही बस रुकवाई और मेरा फ़ोन जाकर उठा लाएं। भयानक एक्सीडेंट ने मेरे फ़ोन का बाल भी बांका नहीं किया था। वो बिल्कुल सुरक्षित था।

मेरे हाथ में फ़ोन के आते ही मैंने सबसे पहले उसे साइलेंट मोड़ पर किया। पता नहीं कैसे ये खुद ब खुद वाइब्रेट मोड़ पर चला गया था। उसके बाद कॉलेज पहुँचकर मैंने उस अनजान नंबर पे कॉल लगाया जिसका फ़ोन आने के दौरान ही फ़ोन मेरे हाथ से छूट गया था। बड़ा गन्दा सा कॉलर ट्यून लगा रखा था बन्दे ने  जैसे "आप


 बीती" भूतिया सीरियल शुरू होने से पहले  कुछ डरावने धुन बजते है, बिल्कुल वैसा ही। काफ़ी देर तक रिंग जाने के बाद किसी ने फ़ोन उठाया। पर बोला कुछ नहीं। मैं हेलो हेलो करती रही पर उधर से कोई जवाब नहीं आया बस बैकग्राउंड में किसी के चीखने की, कभी हँसने की,और कभी रोने की आवाजे आती रही। एक पल के लिए तो मेरा भी दिल धक से रह गया कही ये किसी भूत बुत का नंबर तो नहीं। डरकर मैंने फ़ोन काट दिया। पर अब उधर से फ़ोन आने शुरू हो गए। मैं जब भी उठाती वहीं सब सुनाई देता कोई कुछ नहीं बोलता। मैं परेशान होकर फ़ोन काट देती।


कुछ दिनों बाद एक दिन जब मैं कॉलेज के कैंटीन में सहेलियों के साथ बैठी थी। तब फ़िर उस नंबर से कॉल आने लगा मैं बार बार कॉल डिसकनेक्ट करती पर बार बार फ़ोन आने लगता। तभी मुझे परेशान देखकर मेरी एक सहेली ने पूछा कौन परेशान कर रहा तुझे? मैंने मज़ाक मज़ाक में उस से कह दिया कि ये कोई भूत का नंबर है। तो वे सब सीरियस हो गयी और सभी ने मुझसे वो नंबर ले लिया। मुझे भला क्या आपत्ति हो सकती थी। वैसे भी बन्दे ने मुझे बार बार फ़ोन कर कर के परेशान ही कर रखा था। अब जब मेरी सहेलियां उसे तंग करेगी तब मुझे भी बहुत मज़ा आएगा।

मैंने गौर किया कि उस दिन के बाद से उस अनजान नंबर से कॉल आना काफ़ी हद तक कम हो गया था। पर कॉलेज के अंदर एक नई चीज शुरु हो चुकी थी। भूत के नंबर का आदान प्रदान करना। हर किसी के जुबान पर बस यही रहता था। कि "भूत का नंबर लेगी"? इस बात का इतना ज़्यादा फैलना इसलिए भी आसान हुआ क्योंकि उस नंबर का जो कॉलर ट्यून था वो भी भूतिया था। और कॉल उठाने के बाद जो बैकग्राउंड से तरह तरह की आवाज़ आती थी वो भी डरावना था। ले दे के वो जो कोई भी बन्दा था वो बुरी तरह फंस चुका था।


अब तो दीवारों पर भी पढ़ने को मिलता "भूत का नंबर 9356****" यकीन न हो तो कॉल लगाकर देख लेना"।
हद तो तब हो गयी जब एक दिन मेरी छोटी बहन उस नंबर को कागज़ में लिखकर ले आयी और मुझसे "बोली दीदी इस नंबर पे कॉल लगाओ न एक बार ये भूत का नंबर है"। उस दिन मैं हँसते हँसते लोट पोट हो गयी और घर में सबको बता दिया कि भूत का नंबर मैंने ही वायरल किया था। पर पापा ने बहुत डांट लगायी और ये भी कहा कि फ़ोन कर के उसे सॉरी कहूँ।


मुझे भी बेचारे पर अब तरस आने लगा। मैंने उस नंबर पर एक बार और कॉल लगाया। कई बार फ़ोन काटने के बाद आखिरकार उसने फ़ोन उठाया, तो मैंने हेलो बोले बग़ैर ही कहना शुरू कर दिया। "भूत महाशय आप जो भी है मैंने बस आपसे इतना कहने के लिए फ़ोन किया है कि, आप पर जो आजकल नयी मुशीबत आयी है न ये मेरी ही वजह से हुआ है।


मैंने ही आपका नंबर भूत के नंबर से फेमस कर दिया। क्योंकि आप बार बार मुझे कॉल करते थे, और कुछ बोलते तक नहीं थे। दूसरी बात ये है कि आपने जो अपना कॉलर ट्यून भूतों वाला लगाकर रखा है न, ये बदल दीजिये। और बैकग्राउंड में जो ये भूतिया आवाज़ आती है इसे भी बदलिए अगर आप इस मुशीबत से बाहर आना चाहते है तो । हो सके तो अपना सिम कार्ड ही बदल दीजिये"। इतना सुनने के बाद उसने फ़ोन काट दिया।


पर दस मिनट बाद उधर से दुबारा कॉल आया। इस बार कोई बैकग्राउंड आवाज़ नहीं थी। बन्दे ने अपनी आवाज़ से बोला "बेवकूफ लड़की तुमने मेरी जिंदगी को झंड कर रखा है। हर दिन मेरे पास 500 कॉल आते है और सभी यही पूछते हैं कि आप भूत बोल रहे है क्या? मैं बेचारा टी.वी. दुकान में काम करता हूँ। मेरे सामने मेरा खड़ूस मालिक बैठा रहता है इसलिए मैं फ़ोन में कुछ बोल भी नहीं पाता। और दुकान में ढेर सारे टी.वी. एक साथ चालू रहते है इसलिए बैकग्राउंड में वही सब आवाज़ जाती होगी।




मैंने  दो महीने पहले ही नया फ़ोन खरीदा था नए सिम कार्ड में बैलेंस भी ज़्यादा था इसलिए अनजान नंबरो में कॉल लगा लगा कर अनजान लोगों की आवाज़ें सुनता था। बस कुछ बोल नहीं पाता था। उन्हीं में से एक तुम्हारा भी नंबर था। पर मुझे तुम्हारी आवाज़ बहुत अच्छी लगी थी, इसीलिए तुम्हें बार बार कॉल कर देता था। पर तुमने तो अच्छा मज़ा चखाया मुझे। अब जैसे बात फैलाई थी वैसे ही इसे बंद करवाओ। मैं अपना नंबर नहीं बदल सकता। ये कहकर उसने गुस्से से फ़ोन काट दिया।



मैं बहुत देर तक बेचारे की किस्मत पर हँसती रही। जितना हो सके मैंने सबको समझाया की ये भूत का नंबर नहीं है। पर एक बार जीभ से निकली बात कहा वापस आती है।


गुस्सा शांत होने के बाद उसने मुझे दुबारा कॉल किया। और कुछ दिनों बाद ही हमारी दोस्ती हो गयी। इस बात को छह साल गुज़र चुके थे। पर कल जब मैं अपने पति के साथ नाश्ता कर रही थी तभी मेरे पति के नंबर पर एक अनजान कॉल आया, और पति के फ़ोन उठाते ही उधर से डरते डरते किसी लड़की की आवाज़ आयी " ये भूत का नंबर है क्या? मुझे ये नंबर मुम्बई के लोकल ट्रेन के बाथरूम में लिखा मिला" पति का फ़ोन स्पीकर पे था। लड़की की बात सुनते ही हम दोनों एक साथ खिलखिलाकर हंस पड़े।


फ़िर हँसते हँसते मैंने उस लड़की को जवाब दिया जी बिल्कुल ये भूत का ही नंबर है, और मैं भूत की पत्नी भूतनी हूँ।।।।

Wednesday, January 8, 2020

January 08, 2020

रहस्यम ताबीज़ वाली कहानी का क्या राज़ है

जब वह कब्रिस्तान के भीतर चली गई फिर उसमे क्या हुआ :- What happened when she went inside the cemetery. 




बहुत संक्षेप में एक कहानी बुर्के वाली दो औरतों की। कहानी की शुरुआत एक औरत से होती है जिसका पति बहुत बीमार था। दवा-दारु चल रही थी। लेकिन उसके पति के स्वास्थ्य में कोई लाभ न हुआ। तो बाबाओं के यहाँ चक्कर लगाना शुरू किया। एकदिन वह एक ऐसे आदमी से मिली जो अपने आप को काले इल्म और रूहानी ताकतों का मालिक बताता था।


उसने औरत से कहा- तु अगर अपनी मदद करने को खुद तैयार है तो मैं तेरी मदद कर सकता हूँ। उसने महिला को तीन रुई की बाती जैसी एक चीज दी और कहा- रात को कब्रिस्तान में जाना इसे जलाना और एक पुकारना कोई ना कोई तेरी मदद को जरूर आएगा।



वो कैसा होगा मैं बता नहीं सकता वो औरत हो या फिर मर्द हो, बहुत सुन्दर हो या बहुत भंयकर हो लेकिन तु डरना नही वो जो पूछे उसका जबाब देना तुझें मदद मिल जाएगी। औरत घर पहुची लेकिन पति को कुछ नहीं बताया। वह फैसला नहीं कर पा रही थी। कही वो जाल में तो नहीं फंस जाएगी, इस जमाने में कौन इस तरह की बात में विश्वास करता है। लेकिन रात होते ही उसने तय कर लिया की पति के लिए वह ये जोखिम भी उठाएगी। रात को वह एक झोले में सारा समान लेकर टार्च के साथ कब्रिस्तान के गेट पर पहुँच गई।



 उसने अपने साथ अपने पति का पुराना रामपुरी चाकू भी रख लिया था क्योंकि उसने तय कर लिया था की स्थिति बदली तो या वो जान ले लेगी या जान दे देगी। गेट पर पहुँचकर उसकी हिम्मत जबाब देने लगी। तब उसे अपने पति का चेहरा याद आया।


वह कब्रिस्तान के भीतर चली गई, निर्धारित जगह पर तीनों बत्तीया जलाई फिर उस ना को पुकारने लगी। कुछ देर बाद
 वहाँ दो बुर्के वाली औरते आई और कहा- क्या चाहिए तुझे????
औरत ने कहा- मेरे पति  ठीक हो जाए
उधर से आवाज आई- तो जान चाहिए तुझे.........
जान के बदले क्या दे सकती है?????
औरत गंभीर हो गई और कठोर शब्दों में कहा-मैं अपनी जान दे सकती हूँ अपने पति की जान के बदले....


बुर्केवाली दोनों औरतों की हसी सुनसान कब्रिस्तान में गूंज उठी
उनमें से एक ने अपना हाथ बढ़ाते हुए कहा- ले ये ताबिज 21 दिनों तक के लिए अपने पति के गले में डाल देना और फिर निकाल देना..
और सुन लड़की हमारा काम लेना नही देना है।



औरतें फिर अंधेरे में गायब हो गई। औरत घर लौट आई ताबिज पति को बांध दिया। अब दवाओं का असर कहिए या ताबिज का कमाल उसका पति एक महीने में ठीक हो गया।


औरत माँ बनी, फिर सास बनी, फिर दादी बनी और अपने पोते-पोतियों के लिए उसकी ये कहानी..... एक जाति के रूप में संरक्षित हो गई। 
January 08, 2020

Room No.13 की एक अनसुलझे रहस्यम कहानी

यहा एक सच्ची कहानी जब Room No. 13 मे आज तक कोई नहीं जाता आता है :- Here is a true story when no one comes to room NO. 13. 



मै आपको अपने मित्र नीलेश की बहन नीलिमा और उसकी साली नीतू की आप बीती आप लोगो को बताना चाहती हु | कुछ दिनों पहले नीलेश ने मुझे बताया था कि उसकी बहन की मौत हो गयी है ये सुनकर मै बहुत दुखी हो गयी और मैंने उसकी मौत का कारण पूछा तो उसने पुरी घटना मुझे सुनाई | कुछ दिनों पहले नीलेश उसकी बहन नीलिमा और साली नीतू के साथ कही घुमने गये थे | नीलेश की बहन और नीतू दोनों बहुत अच्छी दोस्त थी |


लौटते वक़्त काफी रात हो गयी थी | रास्ते में उसकी बहन की तबियत खराब हो गयी थी उसे काफी ठण्ड लग रही थी | हमारा घर अभी भी 100 किमी दूर था और रास्ते में कोई भी रुकने की जगह नहीं मिल रही थी | थोड़ी देर के बाद हमे एक होटल दिखाई दी तो नीतू ने होटल में रुककर उसकी बहन को आराम देने को कहा|  उस होटल के काउंटर पर हमने जब रूम के लिए पुछा तो उसने बताया कि सभी रूम फुल थे क्योंकि उस रास्ते पर केवल वही एक ढंग की होटल थी | लेकिन तभी होटल के मेनेजर ने बताया कि एक रूम खाली था

Room No.13

हमने उस समय अन्धविश्वासी वाली बातो को ना सोचकर रूम ले लिया | जैसा कि आप लोग जानते है कि रूम न०. 13 को अशुभ माना जाता है और कई होटलों में इस नंबर का कोई रूम नहीं होता है लेकिन ये होटल कई साल पुराना था |  जैसे ही वो तीनो उस रूम में गये तो उन्हें नेगेटिव एनर्जी महसूस हुई | उस रूम की कंडीशन तो ठीक थी लेकिन ऐसा लग रहा था जैसे बरसों से यहा कोई रहने नहीं आया हो |उन्होंने कुछ ज्यादा नहीं सोचा | अब वो अपनी बहन नीलिमा के लिए काउंटर से पैनकिलर लेने को गया | काउंटर से टेबलेट लेकर जैसे ही रूम में आया तो देखा कि उसकी बहन बालकनी में खडी बाते कर रही थी नीलेश में सोचा नीतू और उसकी बहन दोनों बालकनी में बाते कर रही है लेकिन जैसे ही उसके पास गया तो उसकी बहन के अलावा कोई नहीं था |


उसने उसकी बहन से पुछा कि तुम किससे बाते कर रही थी तो उसने सिर्फ सर हिला कर मना कर दिया | तभी नीतू वाशरूम से आयी |  नीलेश घबरा गया की अगर नीतू वाशरूम में थी तो नीलिमा किससे बात कर रही थी | नीलेश ने नीलिमा को टेबलेट दी और सो जाने को कहा |अब नीतू और नीलिमा दोनों बेड पर सो गये और नीलेश सोफे पर सो गया | सुबह जब क्लीनर कमरे की सफाई के लिए आया तो दरवाज़ा खुला था | और वो जब अंदर आया तो देखा की कमरे में खून की खून था और नीलिमा मर चुकी थी | क्लीनर जोर से चिल्लाया तो मेरी नींद खुल गयी और देखा कि नीलिमा की मौत हो चुकी थी और नीतू बेहोश हो गयी थी | नीलेश जोर जोर से रोने लगा और मेनेजर को बुलाया |  मेनेजर ने तुरंत एम्बुलेंस को बुलाया और दोनों को हॉस्पिटल ले गये |



नीलिमा तो मर चुकी थी लेकिन नीतू को थोड़ी देर में होश आ गया |जैसे ही नीतू को होश आया तो उसके पीछे उसकी बहन की आत्मा थी जो उससे बोल रही थी “तूने मुझे मार दिया ” | यह कहकर वो गायब हो गयी |नीलिमा काफी बुरी तरह डर गयी अब नीलेश में नीतू से सारी घटना पूछी तो उसने बताया कि “रात को जब मै पानी पीने उठी रात तो देखा नीतू फिर से बालकनी में बैठी थी और कुछ बडबडा रही थी और मै जैसे उसके पास गयी और उससे पूछा कि वो यहा क्या कर रही है तो उसने मुझे जोर से धक्का दिया और मेरा सर दीवार से टकरा गया और मै बेहोश हो गयी और इसके अलावा मुझे कुछ याद नहीं है

जैसे ही नीतू हॉस्पिटल से छुटी तो वो नीलेश के साथ उस होटल में गयी और उसने काउंटर पर मेनेजर से बात करने को कहा तो उसने बताया की आपकी घटना के दुसरे दिन मेनेजर की मौत हो गयी थी | वो दोनों शॉक हो गये |उन्होंने क्लीनर से माजरा समझने की कोशिश की तो उसने बताया कि आप जिस रूम में रुके थे वो प्रेतबाधित था और रात में वहा कोई नहीं रुकता है लेकिन मेनेजर ने पैसो के चक्कर में रूम आपको दे दिया | इस रूम में पहले भी दो मौते हो चुकी है | अब सारी बात नीलेश को समझ में आयी |

इस घटना के बाद नीलेश काफी सदमे में चला गया और कभी किसी होटल में नहीं रुका | 

Monday, January 6, 2020

January 06, 2020

भटकती रूह भूत - प्रेत की सच्ची कहानी दिलदाहलने वाली सच्ची तस्बीर

भूत - प्रेत की सच्ची कहानी,  दिलदाहलने वाली सच्ची कहानी, यहा   कहानी  ‘रठासी’ नाम का एक ऐतिहासिक गांव की है | Bhoot - The true story of the phantom, the true story of the heart, here is the story of a historical village named 'Rathasi'.




भूत-प्रेत के किस्से सुनने में बेहद रोमांचक और दिलचस्प लगते हैं लेकिन क्या हो जब यह किस्से सिर्फ किस्से ना रहकर एक हकीकत की तरह आपके सामने आएं? आज की युवा पीढ़ी भूत और आत्माओं के होने पर विश्वास नहीं करती लेकिन जिस पर आप विश्वास नहीं करते वह असल में है ही नहीं यह तो संभव नहीं है ना. आज हम ऐसे ही भूतहा स्थान से आपका परिचय करवाने जा रहे हैं जिसके बारे में कहा जाता है कि इसका निर्माण स्वयं एक आत्मा ने किया था.  जोधपुर (राजस्थान) स्थित बावड़ियों के किस्से स्थानीय लोगों में बहुत मशहूर हैं. यहां पानी की कई बावड़ियां हैं जिनमें से एक के बारे में कहा जाता है कि उसे भूत ने बनवाया था |


 जोधपुर से लगभग 90 किलोमीटर दूरी पर स्थित ‘रठासी’ नाम का एक ऐतिहासिक गांव है. मारवाड़ के इतिहास पर नजर डालें तो यह ज्ञात होता है कि जब जोधपुर में रहने वाले राजपूतों की चम्पावत शाखा का विभाजन हुआ तो उनमें से अलग हुए एक दल ने कापरडा गांव में रहना शुरू किया. लेकिन इस स्थान पर रहने वाले युवा राजपूत राजकुमारों ने गांव में साधना करने वाले साधु-महात्माओं को परेशान करना शुरू कर दिया. उन राजकुमारों से क्रोधित होकर साधुओं ने उन्हें श्राप दे दिया कि उनके आने वाली पीढ़ी इस गांव में नहीं रह पाएगी.  साधुओं के श्राप की बात जब राजकुमारों ने अपने घर में बताई तो सभी भयभीत हो गए और उस गांव को छोड़कर चले गए. इस गांव को छोड़कर वह जिस गांव में रहने के लिए गए उस गांव का का नाम है रठासी गांव. यह जोधपुर से लगभग 90 किलोमीटर की दूरी पर स्थित एक ऐतिहासिक गांव है |



  इस गांव में एक बावड़ी है जिसके बारे में कहा जाता है कि वह भूतों के सहयोग से बनी है अर्थात उस बावड़ी को बनाने में भूत-प्रेतों ने गांव वालों की सहायता की थी. ठाकुर जयसिंह के महल में स्थित इस बावड़ी को देखने के लिए लोग दूर-दूर से आते हैं. इस बावड़ी के विषय में यह कहानी प्रचलित है कि एक बार जब ठाकुर जयसिंह घोड़े पर सवार होकर जोधपुर से रठासी गांव की ओर जा रहे थे तब रास्ते में ठाकुर साहब का घोड़ा उनके साथ-साथ चलने वाले सेवकों से पीछे छूट गया और इतने में रात हो गई.  राजा का घोड़ा काफी थक चुका था और उसे बहुत प्यास लगी थी. रास्ते में एक तालाब को देखकर ठाकुर जयसिंह अपने घोड़े को पानी पिलाने के लिए ले गए.


आधी रात का समय था घोड़ा जैसे ही आगे बढ़ा राजा को एक आकृति दिखाई दी जिसने धीरे-धीरे इंसानी शरीर धारण कर लिया. राजा उसे देखकर डर गया, उस प्रेत ने राजा को कहा कि मुझे प्यास लगी है लेकिन श्राप के कारण मैं इस कुएं का पानी नहीं पी सकता. राजा ने उस प्रेत को पानी पिलाया और राजा की दयालुता देखकर प्रेत ने उसे कहा कि वह जो भी मांगेगा वह उसे पूरी कर देगा.  राजा ने प्रेत को कहा कि वह उसके महल में एक बावड़ी का निर्माण करे और उसके राज्य को सुंदर बना दे. भूत ने राजा के आदेश को स्वीकारते हुए कहा कि वो ये कार्य प्रत्यक्ष रूप से नहीं करेगा, लेकिन दिनभर में जितना भी काम होगा वह रात के समय 100 गुना और बढ़ जाएगा |


उस प्रेत ने राजा को यह राज किसी को ना बताने के लिए कहा. इस घटना के दो दिन बाद ही महल और बावड़ी की इमारतें बनने लगीं. रात में पत्थर ठोंकने की रहस्यमय आवाजें आने लगीं, दिन-प्रतिदिन निर्माण काम तेज गति से बढ़ने लगा. लेकिन रानी के जिद करने पर राजा ने यह राज रानी को बता दिया कि आखिर निर्माण इतनी जल्दी कैसे पूरा होता जा रहा है. राजा ने जैसे ही यह राज रानी को बताया सारा काम वहीं रुक गया. बावड़ी भी ज्यों की त्यों ही रह गई. इस घटना के बाद किसी ने भी उस बावड़ी को बनाने की कोशिश नहीं की |

Sunday, January 5, 2020

January 05, 2020

विक्रम और बेताल एक मजेदार कहानी, जब राजा के छ: लड़के थे

विक्रम और बेताल एक मजेदार कहानी, जब राजा के छ: लड़के थे जो सब-के-सब बड़े ही चतुर और बलवान थे। Vikram and Betal A funny story, when the king had six boys who were all very clever and powerful.




बहुत पुरानी बात है। धारा नगरी में गंधर्वसेन नाम का एक राजा राज करते थे। उसके चार रानियाँ थीं। उनके छ: लड़के थे जो सब-के-सब बड़े ही चतुर और बलवान थे। संयोग से एक दिन राजा की मृत्यु हो गई और उनकी जगह उनका बड़ा बेटा शंख गद्दी पर बैठा। उसने कुछ दिन राज किया, लेकिन छोटे भाई विक्रम ने उसे मार डाला और स्वयं राजा बन बैठा। उसका राज्य दिनोंदिन बढ़ता गया और वह सारे जम्बूद्वीप का राजा बन बैठा। एक दिन उसके मन में आया कि उसे घूमकर सैर करनी चाहिए और जिन देशों के नाम उसने सुने हैं, उन्हें देखना चाहिए। सो वह गद्दी अपने छोटे भाई भर्तृहरि को सौंपकर, योगी बन कर, राज्य से निकल पड़ा।

उस नगर में एक ब्राह्मण तपस्या करता था। एक दिन देवता ने प्रसन्न होकर उसे एक फल दिया और कहा कि इसे जो भी खायेगा, वह अमर हो जायेगा। ब्रह्मण ने वह फल लाकर अपनी पत्नी को दिया और देवता की बात भी बता दी। ब्राह्मणी बोली, “हम अमर होकर क्या करेंगे? हमेशा भीख माँगते रहेंगें। इससे तो मरना ही अच्छा है। तुम इस फल को ले जाकर राजा को दे आओ और बदले में कुछ धन ले आओ।”

यह सुनकर ब्राह्मण फल लेकर राजा भर्तृहरि के पास गया और सारा हाल कह सुनाया। भर्तृहरि ने फल ले लिया और ब्राह्मण को एक लाख रुपये देकर विदा कर दिया। भर्तृहरि अपनी एक रानी को बहुत चाहता था। उसने महल में जाकर वह फल उसी को दे दिया। रानी की मित्रता शहर-कोतवाल से थी। उसने वह फल कोतवाल को दे दिया। कोतवाल एक वेश्या के पास जाया करता था। वह उस फल को उस वेश्या को दे आया। वेश्या ने सोचा कि यह फल तो राजा को खाना चाहिए। वह उसे लेकर राजा भर्तृहरि के पास गई और उसे दे दिया। भर्तृहरि ने उसे बहुत-सा धन दिया; लेकिन जब उसने फल को अच्छी तरह से देखा तो पहचान लिया। उसे बड़ी चोट लगी, पर उसने किसी से कुछ कहा नहीं। उसने महल में जाकर रानी से पूछा कि तुमने उस फल का क्या किया।


रानी ने कहा, “मैंने उसे खा लिया।” राजा ने वह फल निकालकर दिखा दिया। रानी घबरा गयी और उसने सारी बात सच-सच कह दी। भर्तृहरि ने पता लगाया तो उसे पूरी बात ठीक-ठीक मालूम हो गयी। वह बहुत दु:खी हुआ। उसने सोचा, यह दुनिया माया-जाल है। इसमें अपना कोई नहीं। वह फल लेकर बाहर आया और उसे धुलवाकर स्वयं खा लिया। फिर राजपाट छोड, योगी का भेस बना, जंगल में तपस्या करने चला गया।

भर्तृहरि के जंगल में चले जाने से विक्रम की गद्दी सूनी हो गयी। जब राजा इन्द्र को यह समाचार मिला तो उन्होंने एक देव को धारा नगरी की रखवाली के लिए भेज दिया। वह रात-दिन वहीं रहने लगा।

भर्तृहरि के राजपाट छोड़कर वन में चले जाने की बात विक्रम को मालूम हुई तो वह लौटकर अपने देश में आया। आधी रात का समय था। जब वह नगर में घुसने लगा तो देव ने उसे रोका। राजा ने कहा, “मैं विक्रम हूँ। यह मेरा राज है। तुम रोकने वाले कौन होते होते?”

देव बोला, “मुझे राजा इन्द्र ने इस नगर की चौकसी के लिए भेजा है। तुम सच्चे राजा विक्रम हो तो आओ, पहले मुझसे लड़ो।”\n\n

दोनों में लड़ाई हुई। राजा ने ज़रा-सी देर में देव को पछाड़ दिया। तब देव बोला, “हे राजन्! तुमने मुझे हरा दिया। मैं तुम्हें जीवन-दान देता हूँ।”

इसके बाद देव ने कहा, “राजन्, एक नगर और एक नक्षत्र में तुम तीन आदमी पैदा हुए थे। तुमने राजा के घर में जन्म लिया, दूसरे ने तेली के और तीसरे ने कुम्हार के। तुम यहाँ का राज करते हो, तेली पाताल का राज करता था। कुम्हार ने योग साधकर तेली को मारकर शम्शान में पिशाच बना सिरस के पेड़ से लटका दिया है। अब वह तुम्हें मारने की फिराक में है। उससे सावधान रहना।”

इतना कहकर देव चला गया और राजा महल में आ गया। राजा को वापस आया देख सबको बड़ी खुशी हुई। नगर में आनन्द मनाया गया। राजा फिर राज करने लगा।

एक दिन की बात है कि शान्तिशील नाम का एक योगी राजा के पास दरबार में आया और उसे एक फल देकर चला गया। राजा को आशंका हुई कि देव ने जिस आदमी को बताया था, कहीं यह वही तो नहीं है! यह सोच उसने फल नहीं खाया, भण्डारी को दे दिया। योगी आता और राजा को एक फल दे जाता।

संयोग से एक दिन राजा अपना अस्तबल देखने गया था। योगी वहीं पहुँच और फल राजा के हाथ में दे दिया। राजा ने उसे उछाला तो वह हाथ से छूटकर धरती पर गिर पड़ा। उसी समय एक बन्दर ने झपटकर उसे उठा लिया और तोड़ डाला। उसमें से एक लाल निकला, जिसकी चमक से सबकी आँखें चौंधिया गयीं। राजा को बड़ा अचरज हुआ। उसने योगी से पूछा, “आप यह लाल मुझे रोज़ क्यों दे जाते हैं?”

योगी ने जवाब दिया, “महाराज! राजा, गुरु, ज्योतिषी, वैद्य और बेटी, इनके घर कभी खाली हाथ नहीं जाना चाहिए।”

राजा ने भण्डारी को बुलाकर पीछे के सब फल मँगवाये। तुड़वाने पर सबमें से एक-एक लाल निकला। इतने लाल देखकर राजा को बड़ा हर्ष हुआ। उसने जौहरी को बुलवाकर उनका मूल्य पूछा। जौहरी बोला, “महाराज, ये लाल इतने कीमती हैं कि इनका मोल करोड़ों रुपयों में भी नहीं आँका जा सकता। एक-एक लाल एक-एक राज्य के बराबर है।”

यह सुनकर राजा योगी का हाथ पकड़कर गद्दी पर ले गया। बोला, “योगीराज, आप सुनी हुई बुरी बातें, दूसरों के सामने नहीं कही जातीं।”

राजा उसे अकेले में ले गया। वहाँ जाकर योगी ने कहा, “महाराज, बात यह है कि गोदावरी नदी के किनारे मसान में मैं एक मंत्र सिद्ध कर रहा हूँ। उसके सिद्ध हो जाने पर मेरा मनोरथ पूरा हो जायेगा। तुम एक रात मेरे पास रहोगे तो मंत्र सिद्ध हो जायेगा। एक दिन रात को हथियार बाँधकर तुम अकेले मेरे पास आ जाना।”

राजा ने कहा “अच्छी बात है।”

इसके उपरान्त योगी दिन और समय बताकर अपने मठ में चला गया।

वह दिन आने पर राजा अकेला वहाँ पहुँचा। योगी ने उसे अपने पास बिठा लिया। थोड़ी देर बैठकर राजा ने पूछा, “महाराज, मेरे लिए क्या आज्ञा है?”

योगी ने कहा, “राजन्, “यहाँ से दक्षिण दिशा में दो कोस की दूरी पर मसान में एक सिरस के पेड़ पर एक मुर्दा लटका है। उसे मेरे पास ले आओ, तब तक मैं यहाँ पूजा करता हूँ।”

यह सुनकर राजा वहाँ से चल दिया। बड़ी भयंकर रात थी। चारों ओर अँधेरा फैला था। पानी बरस रहा था। भूत-प्रेत शोर मचा रहे थे। साँप आ-आकर पैरों में लिपटते थे। लेकिन राजा हिम्मत से आगे बढ़ता गया। जब वह मसान में पहुँचा तो देखता क्या है कि शेर दहाड़ रहे हैं, हाथी चिंघाड़ रहे हैं, भूत-प्रेत आदमियों को मार रहे हैं। राजा बेधड़क चलता गया और सिरस के पेड़ के पास पहुँच गया। पेड़ जड़ से फुनगी तक आग से दहक रहा था। राजा ने सोचा, हो-न-हो, यह वही योगी है, जिसकी बात देव ने बतायी थी। पेड़ पर रस्सी से बँधा मुर्दा लटक रहा था। राजा पेड़ पर चढ़ गया और तलवार से रस्सी काट दी। मुर्दा नीचे किर पड़ा और दहाड़ मार-मार कर रोने लगा।

राजा ने नीचे आकर पूछा, “तू कौन है?”

राजा का इतना कहना था कि वह मुर्दा खिलखिकर हँस पड़ा। राजा को बड़ा अचरज हुआ। तभी वह मुर्दा फिर पेड़ पर जा लटका। राजा फिर चढ़कर ऊपर गया और रस्सी काट, मुर्दे का बगल में दबा, नीचे आया। बोला, “बता, तू कौन है?”

मुर्दा चुप रहा।

तब राजा ने उसे एक चादर में बाँधा और योगी के पास ले चला। रास्ते में वह मुर्दा बोला, “मैं बेताल हूँ। तू कौन है और मुझे कहाँ ले जा रहा है?”

राजा ने कहा, “मेरा नाम विक्रम है। मैं धारा नगरी का राजा हूँ। मैं तुझे योगी के पास ले जा रहा हूँ।”

बेताल बोला, “मैं एक शर्त पर चलूँगा। अगर तू रास्ते में बोलेगा तो मैं लौटकर पेड़ पर जा लटकूँगा।”

राजा ने उसकी बात मान ली। फिर बेताल बोला, “ पण्डित, चतुर और ज्ञानी, इनके दिन अच्छी-अच्छी बातों में बीतते हैं, जबकि मूर्खों के दिन कलह और नींद में। अच्छा होगा कि हमारी राह भली बातों की चर्चा में बीत जाये। मैं तुझे एक कहानी सुनाता हूँ। ले, सुन।

Saturday, January 4, 2020

January 04, 2020

यहा एक सच्ची कहानी है जो मेरे दोस्त के साथ घाटी

यहा घटना एक सच्ची है, जो की मेरे राहुल दोस्त के साथ घाटी :- The incident here is a true one, that Valley with my Rahul friend.



मेरा नाम राहुल  है। और में जामनगर शहर में रहती हूँ। मै एक टीचर हूँ। मुजे बचपन से ही तैराकी का जबरा शौख रहा है। बचपन में हम जब खंभालिया तालुके में रहते थे, तभी पिताजी मुजे और मेरी बहन प्रीती को नदी पर तैरना सिखाने ले जाते थे।


रामनाथ मंदिर के पास बहने वाली “घी नदी” साल के नौ महीने पानी से लबरेज़ (भरपूर) रहती है। उनही दिनों नदी में तैराकी करते वक्त मै एक भयानक एहसास से गुजरी थी। जिसने मेरी जिंदगी बदल कर रख दी। मेरे साथ वह दर्दनाक हाथसा हुआ तब में सोलह साल की थी। और ग्यारहवि कक्षा में थी।


वह के सामान्य दिन था, रोज़ की तरह मै मेरी बहन प्रीती और पापा नदी पर गए। उस दिन पानी काफी ठंडा था। इस लिए पापा ने मुजे और प्रीती को कमर से ज्यादा गहरे पानी मै जाने से मना किया था। और वह खुद नदी के पास स्थित रामनाथ मंदिर में दर्शन करने चले गए।


मै और प्रीती पानी में उतरी और हसी मज़ाक करते हुए तैराकी करने लगी। तभी अचानक मुजे महसूस हुआ की मेरी बहन प्रीती मुजसे दूर थोड़े गहरे पानी में जाने लगी। मै फौरन उस पर चिल्लाई, पर वह फिर भी आगे ही आगे गहरे पानी में जाने लगी।


मै प्रीती को पकड़ के वापीस लाने उसके पीछे पीछे गहरे पानी में जाने लगी। अब पानी मेरे गले तक था। अचानक प्रीती मेरी आँखों से औजल (गायब) हो गयी। मुजे लगा वह डूब गयी। और तब खौफ के मारे, मेरी विकराल चीख निकल गयी। तभी अचानक प्रीती पानी से बाहर आई और मुजे देख कर हंसने लगी। मैने पानी में ही तैरते तैरते उसे ज़ोर का लाफा मार दिया… और उसके बाद जो हुआ उस मंज़र को देख कर मेरी रूह कांप गयी।


प्रीती मुजे घूरने लगी… और प्रीती पानी में तैरते हुए पानी में ऊपर उठने लगी… वह कमर तक पानी से ऊपर उठ गयी… गले तक गहरे पानी में तैरते हुए किसी इन्सान का ऐसा करना नामुमकिन होता है, यह मुजे पता था। फौरन में समज गयी की मेरी जान आफत में है।


तभी यक यक मेरी नज़र नदी किनारे पर पड़ी… मैने देखा की नदी किनारे मेरे पिता और मेरी बहन प्रीती खड़े हैं। और मेरी और देख कर चिल्ला रहे हैं। अब मै उस पानी मै ऊपर उठे हुए भूत की और देखना भी नहीं चाहती थी, क्यूँ की मुजे पता चल गया था की उसने मेरी छोटी बहन का रूप ले कर मुजे गहरे पानी में लाने का जाल बिछाया था। मै एक गहरी साँस भर के, ज़ोर लगाते हुए, डरते कांपते किनारे की और तैरने लगी। पर वह ज़ालिम भूतनी कहाँ मुजे इतनी जल्दी छौड्ने वाली थी। उसने अपना असली रूप दिखाया और घूम कर मेरे सामने आ खड़ी हुई।


उसके मुह से मांस लटक रहा था। दाँत उसके काले और नुकीले थे। और उसके बालों में कीड़े लगे थे। आंखे खून भरी लाल थी। और वह भूतनी मुजे ऐसे देख रही थी जैसे वह मुजे खा ही जाएगी। मेर हाथ पैर उसे देख कर, डर के मारे जमने लगे थे। फिर भी मैने उस भूतनी के पास से घुमाव ले कर, तैर कर किनारे की और तैर कर भागने की कौसिस की। पर उसने पानी में जा कर मेरा एक पैर पकड़ लिया।


उसकी पकड़ आज भी मुजे याद है। जेसे किसी गरम लोहे की जंजीर ने जकड़ रखा हो। जैसे ही उसने मेरा पैर पकड़ा मेरी हिम्मत जवाब दे गयी। और मैने पानी में तैरना छौड़ दिया। और आने वाली दर्द नाक मौत के लिए मै खूद को तयार करने लगी। दो तीन बार मै पानी के अंदर बाहर हुई। तभी अचानक मेरे हाथ को किसी ने कस कर पकड़ा और वह पवन की रफ्तार से खींच कर मुजे किनारे की और बहाने लगा। और उसी वक्त, तुरंत ही मेरे पैर की पकड़ भी छूट गयी। मुजे जब हौश आया तो मै नदी किनारे पड़ी थी। और मेरे पापा और प्रीती पास बैठ कर मुजे हौश मै लाने की कौशीस कर रहे थे।


“प्रीती ने कहा की वह कभी गहरे पानी की और गयी ही नहीं थी। मेरे पापा ने कहा की उसे पानी में कोई भूतनी मेरे सामने खड़ी दिखी ही नहीं। पापा ने कहा की गहरे पानी से नदी की और में खुद बह कर आई, उन्होने मुजे ना तो खुद बचाया था, नाहीं किसी और को मुजे नदी किनारे वापीस खिचते हुए देखा।”

“शायद उस पानी में एक बुरी शक्ति थी जो मेरा भोग लेना चाहती थी। और वहीं पर एक भली शक्ति थी जिसने मुजे उस भूतनी के चंगुल से छुड़ा कर किनारे पर ला फेंका।“

Friday, January 3, 2020

January 03, 2020

सात खूनी दरवाजों का खोफनाक रास्ता

यहा एक गांव की घटना है जहां एक घर की एक अनोखी दरवाजा :- Here is a village incident where a unique door of a house.




आज से 50 साल पहले डकैतों का संघगठन हुआ करता था। इस संघगठन मे लगभग 10 लोग हुआ करते थे और ये डकैत गरीबो को लूटा करते थे। उस समय पर डकैत सिर्फ घोड़ो पर ही आया जाया करते थे क्योकि उस समय मे कार और मोटरसाइकिल जैसी सुविधा बहुत ज्यादा कम थी इसलिए डकैतों की सबसे अच्छी सवारी घोड़े हुआ करती थी क्योकि आप अच्छी तरह से जानते ही होंगे और आपने फिल्मों मे भी ऐसा होता हुआ देखा होगा। उस पर पुलिस भी इतनी ज्यादा सक्रिय नहीं हुआ करती थी इसलिए डकैतों के संघगठन पनप रहे थे।


इन 10 को धन दौलत का इतना मोह था कि यह डकैत किसी हद तक जाने को तैयार रहते थे। इन डकैतों ने सेकड़ों घरों को बर्बाद कर दिया था। सेकड़ों बच्चो को यतीम और सेकड़ों महिलाओ को इन्होने विधवा बना दिया था। ये डकैत अपनी दौलत की भूख के आगे इतने बेरहम हो गए थे कि इनको दौलत के आगे कुछ भी दिखाई नहीं देता था। इनके आगे चाहे बच्चा आ जाए या फिर कोई गर्भवती ये डकैत इन पर भी रहम नहीं दिखाते थे। इन्होने ने सेकड़ों घरों मे आग लगाकर हजारो लोगो का कत्लयाम किया था।


ये डकैत रात के अंधेरे मे गाँव मे घुसकर गरीबो को लूटा करते थे और उन गरीबो के साथ आत्याचार किया करते थे। ये इनका रोजाना का पैसा बन चुका था। ये 10 डकैत दौलत के नशे मे आदमखोर बन चुके थे। ये गरीबो का पैसा लूटकर अपनी शैतानी  भूख को मिटाते थे।

लेकिन दोस्तो पाप का घड़ा एक न एक दिन जरूर ही भरता और बाद मे फूटता भी है ऐसा ही इन 10 डकैतो के साथ भी होने जा रहा था। एक बार इन डकैतों का संघगठन एक गाँव की तरफ उस गाँव को लूटने के लिया रवाना हो जाता है उस समय रात का अंधेरा होता है और ये डकैत उस गाँव मे दाखिल हो जाते है लेकिन क्या देखते है कि इस गाँव मे दूर- दूर तक कोई नजर नहीं आता है केवल एक बुजुर्ग उस गाँव मे खाट पर बैठा हुआ दिखाई देता है। इन डकैतों को आश्चर्य होता है कि ऐसा हमने आज से पहले कभी नहीं देखा कि गाँव मे सिर्फ एक आदमी रहता है वो भी बुजुर्ग। ये सभी डकैत उस बुजुर्ग के पास पहुचे और पूझा की इस गाँव के लोग कहा गए है।

बुजुर्ग को तो पहले से ही पता था कि इस गाँव के लोग कहा गए है लेकिन यह बात उस बुजुर्ग ने उन डकैतो से छिपा ली ताकि उन सभी गाँव वालों की जान बच सके ताकि वह अपने आप को उन डकैतों से अपने बच्चे और परिवार को बचा सके।

वह बुजुर्ग काफी ज्यादा शातिर था और उसकी उम्र 85 साल थी। इस बुजुर्ग ने पहले से ही योजना बना ली थी कि इन डकैतों को ठिकाने कैसे लगाया जाए।

इस योजना के हिसाब से बुजुर्ग ने डकैतो के आने से पहले ही एक पहले सभी गाँव वालों को यह कहकर उस गाँव से भगा दिया था क्योकि उस बुजुर्ग को अंदाजा था कि कभी न कभी इस गाँव मे वह डकैत जरूर ही कदम रखेंगे। योजना के हिसाब से सभी गाँव के परिवार के लोगो को जंगल की और रवाना कर दिया था और अपनी जान की परवा किए बिना यह बुजुर्ग उन डकैतो को ठिकाना लगाना चाहता था।

उस बुजुर्ग ने एक ऐसी खतरनाक योजना बनाई थी कि उन डकैतो को उस योजना मे अपने जाल मे फसाना था और उन डकैतो को जड़ से खत्म करना था। बुजुर्ग की योजना मे था कि उस गाँव से 150 किलो मीटर दूर एक पहाड़ी थी उस पहाड़ी के नीचे एक गुफा थी जो बहुत ही ज्यादा खतरनाक थी। उस बुजुर्ग को पता था कि उस गुफा मे किसी का जाना बेहद ही खतरनाक हो सकता है क्योकि उस गुफा के अंदर 7 खूनी दरवाजे थे जहा पर एक दरवाजे मे एक खूंखार शैतान रहा करता था।

उस गाँव मे बैठे बुजुर्ग से उन डकैतों ने पूझा की इस गाँव के लोग कहा गए है।

बुजुर्ग ने जबाब दिया:- इस गाँव के लोग एक खजाने की तलाश मे गए है जहा पर बहुत सारा सोना, चाँदी, हीरे और मोती छिपे हुए है। बुजुर्ग ये भी कहा कि मे भी उस खजाने को प्राप्त करना चाहता था लेकिन मुझसे इतनी दूर चला नहीं जाएगा।

डकैतों ने उस बुजुर्ग की बातों को सुना और बाद मे बुजुर्ग से कहा क्या ये सही बात है तो बुजुर्ग ने कहा हाँ ये सही बात है तो डकैतो को उस बुजुर्ग की बात पर भरोषा हो गया था जब उनको लगा की बकाई मे वहा पर खजाना छिपा है तो उस बुजुर्ग को वही पर कत्ल कर देते है और सुबह होते ही वह डकैत अपनी मंजिल की और निकल पड़ते है। साथ मे खाने पीने का समान भी ले लेते है ताकि रास्ते मे कुछ खा सके क्योकि 150 किलो मीटर दूर वह पहाड़ी थी जो की वहा पहुचने के लिए दो से तीन तो लगता।

3 दिन के अंतराल मे ये 10 डकैत उस पहाड़ी तक पहुचे। 10 डकैत उस पहाड़ी तक तो आसानी से पहुच तो गए और उस गुफा को तलाशने लगे जहा पर खजाना पड़ा हुआ था। वह सभी डकैत अलग- अलग रस्तों से उस गुफा की तलाश करने लगे। बड़ी मेहनत करने के बाद इनको वह गुफा दिखाई दी जब यह गुफा इनको दिखाई दी तब इन्होने खुशी मे नृत्य करना शुरू कर दिया। अब ये डकैत सोचने लगे थे कि अब हमे ये खजाना मिल गया है और हम सबसे अमीर व्यक्ति बन जाएंगे।

नृत्य कर- कर उस गुफा के अंदर यह 10 डकैत घुस जाते है और उस गुफा के अंदर कुछ दूरी पर जाते है तो उस गुफा मे रात के अंधेरे के तरह नजारा दिखाई दे रहा था। तब इन्होने उस अंधेरे को दूर करने के लिए कुछ वस्तु को जलाकर कर उस गुफा मे प्रकाश किया। जब इस गुफा मे कुछ हद तक अंधेरा जा चुका था तब यह डकैत आगे की और बढ्ने लगे थे। कुछ दूरी पर जाकर इनको 7 दरवाजे दिखाई दिये और ये डकैत हैरान हो गए कि अब क्या किया जाए।

इन 10 डकैतों ने सबसे पहले इन दरवाजों अच्छे से देखा और धीरे- धीरे इन दरवाजो के पास पहुचे। इनको दरवाजो मे दिखा की सभी दरवाजों मे ताले लगे हुये थे। इन डकैतो को दौलत से इतना प्यार था कि इनसे कुछ समय तक रुका भी नहीं जा रहा था। इन्होने पहला दरवाजा का ताला पत्थर मार- मार के तोड़ा और अंदर जाकर देखा लेकिन उस दरवाजे के अंदर इनको कुछ नजर नहीं आया वल्कि वहा पर चिमकागड़े उल्टी लटकी हुई थी। इन्होने उस दरबाजे का अंदर का कमरा सारा तलाशा लेकिन इनको कुछ हाथ नहीं लग पाया।

ऐसे ही करके इन्होने 6 दरबाजे खोल लिए थे लेकिन इनको इन दरबाजों के अंदर भी कुछ नहीं मिला और ये सभी डकैत हार गए और कुछ देर आराम करने लगे। इन 6 दरबाजों को खोलने के लिए इनको 15 घंटे लगे। 15 घंटे बीतने के बाद ये 7 वा दरबाजा भी खोलने जा रहे थे। दिन मे ये सभी गुफा मे घुसे थे और 6 दरबाजों को खोलते- खोलते इनको रात हो गई थी। 7 वा दरबाजा खोलने ही जा रहे थे तब इनको उस दरबाजे के ताले मे कुछ अजीब चीज सी नजर आई। उस दरबाजे के ताले पर कुछ मंत्र तंत्र जैसी कुछ अजीब सा नजर आ रहा था।

इन 10 डकैतों ने उस चीज को नजर अंदाज कर दिया और वह 7 वा दरबाजा का ताला तोड़ने लगे। जैसे ही ताला टूटता है वैसे ही वह उस दरबाजे के अंदर चले जाते है क्योकि इन्हे खजाना पाने की बहुत जल्दी थी। जब अंदर देखते है तो अंदर कुछ भी नहीं दिखता लेकिन एक बहुत बड़ा बक्सा सा पड़ा हुआ दिखाई देता है। ये 10 डकैत वही पर रुक जाते है और आपस मे सलाह मशहूरा करने लगते है और आखिर मे निर्णय करते है इस बक्से के अंदर ही खजाना छिपा होगा अब इसे ही खोलना चाहिए। इन 10 आदमी मे से एक को कहा जाता की इस बक्से को खोलकर देखो ताकि इसमे खजाना छिपा हो तो एक डकैत उस बक्से को खोलने लगता है जब वह बक्सा खोल लेता है तो उसे एक मरा हुआ शैतान दिखाई पड़ता है जो उस बक्से मे सोया हुआ रहता है।

ये 10 के 10 डकैत उस शैतान को देखते है और वहा से जल्दी से भागने की योजना बनाने लगते है उन्हे एहसास हो गया था कि ये शैतान अभी सोया हुया है और कभी भी ये जाग सकता है। अगर ये शैतान जाग गया तो हमे कच्चा ही खा जाएगा ये बहुत तेज़ी से गुफा से बाहर निकलने की कोशिश करते है और आधे रास्ते तक ही पहुचते तब तक वह शैतान इनके सामने हाजिर हो जाता है। वह शैतान इतना भयानक दिखाता है कि कुछ डकैत इसको देखते ही बेहोश हो जाते है और कुछ डकैतों की पतलूम पीले हो जाती है।

ये डकैत भागने की कोशिश तो बहुत करते है लेकिन उस खतरनाक शैतान सामने भाग नहीं पाते है। वह शैतान आखिर मे सबको मार देता है और कच्चा ही खा जाता है जो इन डकैतों ने गरीबो के साथ किया था ऊपर वाले उससे भी बड़ा बदला लिया।

Thursday, January 2, 2020

January 02, 2020

भूतिया रेलवे स्टेशन जब उसने देखा एक सीट पर भूत

यह घटना एक सबिता की है जब उन्होने  देखा ट्रेन मे एक भूत को :- 

This incident is of a sabita when he saw a ghost in the train.





मानस जी के बेटी सबिता, बेंगलुरु में एक सॉफ्टवेयर कंपनी में काम करता था । मानस जी बेटी को देखने के लिए साल में एक दो बार जरूर बेंगलुरु जाते थे । वहां चार-पांच दिन रुक कर, फिर वापस आ जाते थे । उस दिन यशवंतपुर-पूरी गरीब रथ एक्सप्रेस से वह भुबनेश्वर वापस आ रहे थे । ए.सी. बोगियों में ज्यादा समय बिताने का आदत ना होते भी, बेटी हमेशा ए.सी. ट्रेन में टिकट बुक कर देता था । लगभग 30 घंटे का सफर । इतना समय ए.सी. में बिताना मानस जी के लिए बहुत मुश्किल होता था । क्योंकि बिना चादर ओढ़े ऐ.सी. में बैठा नहीं जाता । सोने का समय छोड़कर बाकी समय भी चादर ओढ़ना, यह उनको अच्छा नहीं लगता था । इसीलिए मानस जी हमेशा इधर उधर चलते फिरते रहते थे । कभी अपने सीट पर बैठकर भूत की कहानी पढ़ते थे, तो कभी दरवाजा के पास खड़ा होकर प्राकृतिक सौंदर्य को देख के खुश होते थे । ऐसे भी दक्षिण भारत का प्राकृतिक परिवेश बहुत सुन्दर है ।


ट्रेन की दोनों तरफ पहाड़, नदी, गांव, शहर आदि देखते देखते ट्रेन आंध्र प्रदेश का दुबड़ा स्टेशन में पहुंच गया । उस वक्त समय लगभग रात के 9:30 बज चुका था । मानस जी घर से लाये हुए डिनर भी ख़तम कर चुके थे । पास में बैठे सभी यात्री यों ने भी अपना-अपना डिनर ख़तम करके सोने की तैयारी में थे । मगर मानस जी को नींद नहीं आ रहा था । वह सोचते थे की; और आधा घंटा के बाद ट्रेन विशाखापट्टनम जंक्शन में पहुँच जाएगा । वहां से ट्रेन छूटने के बाद ही जाकर सोएंगे । ऐसे सोचते हुए ट्रेन दुबड़ा स्टेशन से विशाखापट्टनम की और रवाना हुआ ।


उस वक़्त मानस जी दरवाजे के पास खड़े हुए थे । अचानक उनको लगा, जैसे कोई उनके पीछे खड़ा हुआ है | मानस जी थोड़ा घबरा कर पीछे देखें; एक चाय वाला हाथ में एक चाय का बर्तन लेके खड़ा हुआ था । उसको देख के पता चलता था, जैसे कि वह कई दिनों से सोया नहीं है । दुबला पतला चेहरा और आंखें अंदर की ओर चला गया है । वह मानस जी के पास आया और दरवाजा से बाहर की ओर देखने लगा । मानस जी समझ गए की वह शायद अगले स्टेशन में उतरने वाला है । मानस जी ऐसा सोच कर उसको दरवाजा के पास जाने दिए । और खुद दूसरी तरफ का दरवाजा के पास खड़े हो गए । उस वक्त वहां कोई नहीं था । ए.सी. बोगी का दरवाजा भी बंद था । और लगभग सारे यात्रीओ ने सो चुके थे । आहिस्ता आहिस्ता ट्रेन की रफ्तार तेज होने लगा ।


अचानक दूसरे दरवाजे से एक चीख़ सुनाई दिया । मानस जी उस दरवाजे के तरफ देखे; वह चाय वाला वहां नहीं था । उनके सर चक्कर खा गया । दरवाजे के पास जाकर बाहर की ओर नजर घुमाने लगे, लेकिन रात के अंधेरे में कुछ दिखाई नहीं दे रहा था । वह डर के कांपने लगे । क्या सचमुच वह चाय वाला ट्रेन से गिर गया? वह तुरंत बग्गी के अंदर जाकर उस चाय बाले को ढूंढने लगे । लेकिन वहां भी बह नहीं था । अब मानस जी के मन में बहुत सारे सवाल आने लगा । अगर वह चाये बाला गिर गया होगा, तो अभी तक जिंदा नहीं होगा । मानस जी सोचे की बह उनके बग्गी के पास सोये हुए लोगोको बुलाएँगे | लेकिन फिर सोचे; कौन एक अनजान चाय वाले का मदत करने केलिए आएगा? ऐसा सोच के बह चुप रहे | अब मानस जी के मन विचलित होने लगा ।


अब मानस जी को उस दरवाजे के पास जाने को हिम्मत नहीं था । उनके आंखों के सामने उस गरीब चाय बाले का जिंदगी चला गया । मानस जी बिल्कुल गुमसुम होकर बैठ गए । कुछ समय के बाद ट्रेन विशाखापट्टनम जंक्शन में पहुंच गया । कितने लोग ट्रैन के अंदर आये और कितने लोग बाहर गए | वह भी थोड़ा बाहर आकर घूमने फिरने लगे | लेकिन अंदर ही अंदर वह उस चाय बाले को ही ढूंढ रहे थे । मन ही मन सोच रहे थे; जो बह सोच रहे हैं, वो गलत हो जाये | ऐसा करिश्मा होजाये कि बह चाय वाला दूसरी किसी बग्गी से निकल आये ।


विशाखापट्टनम जंक्शन से ट्रेन छोड़ने का संकेत दिया | मानस जी प्लेटफार्म से अपने बैगी में चढ़े । लेकिन वह उस बात को किसी को बता नहीं पा रहे थे । आहिस्ता आहिस्ता ट्रेन प्लेटफार्म से रवाना होने लगा । ठीक उसी वक्त मानस जी देखें की प्लेटफार्म के एक आखिर बेंच पे वही चाय वाला बैठा है । पास में चाय का बर्तन रखा है । उसे देख के मानस जी के मुख मंडल में चमक आ गया, और वह खुशी से बोल उठे; “है भगबान तुम महान हो” | जितना जितना ट्रेन आगे बढ़ रहा था, उतना उतना मानस जी के नजर से वह चाय वाला का चेहरा रात के अँधेरे में छुप रहा था ।


मानस जी उसी चाय बाले को देख रहे थे | उसी समय एक गार्ड आकर बोला: “सर आप दरवाजा बंद कर दीजिए” मानस जी बोले, “ठीक है कर देंगे” उसने फिर बोलै; “तुरंत बंद कर करके अंदर जाइए” | उसके बाद मानस जी दरवाजा बंद कर दिए और हंसते हुए उस गार्ड को बोले; “आप इस सामान्य बात को लेकर इतना गुस्सा क्यों हो?” उस गार्ड ने बोला; “हम आपसे गुस्सा नहीं हो रहे हैं।” बात यह है कि एक चाय वाला ने इसी दरवाजे से गिरकर अपना जान गवा दिया था । अभी रात को वह चाय वाला सबको बड़ा परेशान कर रहा है । आजकल भूत बनकर किसी भी वक़्त आपको चाय देने आ सकता है ।


उस गार्ड के मुँह से इतना सुनकर मानस जी के बोलती बंद हो गई । कुछ बोलने को हिम्मत नहीं हो रहा था, कि उस चाय वाला को बह एक बार नहीं दो दो बार देख चुके हैं । तुरंत मानस जी अपना सीट पर जाकर सो गए । मगर नींद कहां आने बाला है? बार-बार वह चाय बाले का चेहरा मानस जी को दिखाई दे रहा था | तब से वह रात तो क्या दिन में भी दरवाजे के पास खड़े होने की हिम्मत नहीं करते

Wednesday, January 1, 2020

January 01, 2020

दिल्ली के एक गाँव के कुएं का भूत की कहानी

यहाँ घटना दिल्ली के एक गाँव के कुएं का भूत की है :- The incident here is of the ghost of a village well in Delhi.


यह घटना 1999 के आस पास की है। दिल्ली में रहनेवाले हमारे एक दूर के रिश्‍तेदार पहली बार हमारे गांव जगन्पुरा में अपने एक नजदीकी रिश्‍तेदार के घर पर आए। पर वहां उनका मन नहीं लगता था , रिश्‍तेदार अपने व्‍यवसाय में व्‍यस्‍त रहते और उनकी पत्‍नी अपने छोटे छोटे बच्‍चों में। वे वहां किससे और कितनी देर बातें करतें , उनके यहां जाने में जानबूझकर देर करते थे और हमारे यहां बैठकर बातें करते रहते थे । बडे गप्‍पी थे वो , अक्‍सर वे हमारे घर पहुंच जाते थे और घंटे दो घंटे गपशप करने के बाद खाना खाकर ही लौटते थे।


एक दिन शाम को पहुंचे , तो इधर उधर की बात होते होते भूत प्रेत पर जाकर रूक गयी , भूत प्रेत का नाम सुनते ही उन्‍होने अपनी शौर्यगाथाएं सुनानी शुरू की। फलाने जगह में भूत के भय से जाने से लोग डरते हैं , मैं वहां रातभर रहा , फलाने जगह पर ये किया , वो किया और हम सभी उनके हिम्‍मत के आगे नतमस्‍तक थे। मेरी मम्‍मी ने एक दो बार रात के समय इस तरह की बातें न करने की याद भी दिलायी , पर वो नहीं माने ‘नहीं , चाचीजी , भूत प्रेत कुछ होता ही नहीं है , वैसे ही मन का वहम् है ये’ और न जाने कहां कहां के ऐसे वैसे किस्‍से सुनाते ही रहे।

उस दिन खाते पीते कुछ अधिक ही देर हो गयी थी , रात के ग्‍यारह बज गए थे , गांव में काफी सन्‍नाटा हो जाता है। उस घर के छत से आवाज दे देकर बच्‍चे बार बार बुला रहे थे । सामने के रास्‍ते से जाने से कई मोड पड जाने से उनका घर हमारे घर से कुछ दूर पड जाता था , पर खेत से होकर एक शार्टकट रास्‍ता था । हमलोग अक्‍सर उसी रास्‍ते से जाते आते थे , उन्‍होने भी उस दिन उसी रास्‍ते से जाने का निश्‍चय किया। पीछे के दरवाजे से उन्‍हें भेजकर हमलोग दरवाजा बंद करके अंदर अपने अपने कामों में लग गए। अचानक मेरी छोटी बहन के दिमाग में क्‍या आया , छत पर जाकर देखने लगी कि वे उनके घर पहुंचे या नहीं ? अंधेरा काफी था , मेरी बहन को कुछ भी दिखाई नहीं दिया , वह छत से लौटने वाली ही थी कि उसे महसूस हुआ कि कोई दौडकर हमारे बगान में आया और सामने नीम के पेड के नीचे छुप गया।

*   मेरी बहन ने पूछा ‘कौन है ?‘

*   उनकी आवाज आयी ‘मैं हूं’

*   ‘आप चाचाजी के यहां गए नहीं ?’

‘*    खेत में कुएं के पास कोई बैठा हुआ है’

गांव में रात के अंधेरे में चोरों का ही आतंक रहता है , उनकी इस बात को सुनकर हमलोगों को चोर के होने का ही अंदेशा हुआ , जल्‍दी जल्‍दी पिछवाडे का दरवाजा खोला गया। पूछने पर उन्‍होने हमारे अंदेशे को गलत बताते हुए कहा कि वह आदमी नहीं , भूत प्रेत जैसा कुछ है , क्‍यूंकि कुएं के पास उसकी दो लाल लाल आंखे चमक रही हैं। तब जाकर हमलोगों को ध्‍यान आया कि कुएं के पास खेत में पानी पटानेवाला डीजल पंप रखा है और उसमें ही दो लाल बत्तियां जलती हैं। जब उन्‍हें यह बात बताया गया तो उन्‍होने एकदम से झेंपकर कहा ‘ओह ! हम तो उससे डर खा गए’ ।

 बेचारे कर भी क्‍या सकते थे , इस डर खाने की कहानी ने तुरंत बखानी गई उनकी निडरता की कहानियों के पोल को खोल दिया था। फिर थोडी ही देर बाद वे चले गए , और हमारे घर के माहौल की तो पूछिए मत , हमलोगों को तो बस हंसने का एक बहाना मिल गया था।

Tuesday, December 31, 2019

December 31, 2019

यह एक रहस्य मे कहानी है भूतो की अनोखी कहानी


यह एक रहस्य मे कहानी है भूतो की अनोखी कहानी :- This is a mystery story, a unique story of ghosts.




भूत भी कई प्रकार के होते हैं। आज मैं भूतों की जो कहानी सुनाने जा रहा हूँ ओ बुड़ुआओं (एक प्रकार के भूत) के बारे में है। जब कोई व्यक्ति किसी कारण बस पानी में डूबकर मर जाता है तो वह बुड़ुआ बन जाता है। बुड़ुआ बहुत ही खतरनाक होते हैं पर इनका बस केवल पानी में ही चलता है वह भी डूबाहभर (जिसमें कोई डूब सकता हो) पानी में।

हमारे तरफ गाँवों में जब खाटों (खटिया) में बहुत ही खटमल पड़ जाते हैं और खटमलमार दवा डालने के बाद भी वे नहीं मरते तो लोगों के पास इन रक्तचूषक प्राणियों से बचने का बस एक ही रास्ता बचता है और वह यह कि उस खटमली खाट को किसी तालाब, खंता (गड्ढा) आदि में पानी में डूबो दिया जाए। जब वह खटमली खाट 2-3 दिनतक पानी में ही छोड़ दी जाती है तो ये रक्तचूषक प्राणी या तो पानी में डूबकर मर जाते हैं या अपना रास्ता नाप लेते हैं और वह खाट पूरी तरह से खटमल-फ्री हो जाती है।


एकबार की बात है कि हमारे गाँव के ही एक पंडीजी एक गड्ढे (इस गड्ढे का निर्माण चिमनी के लिए ईंट पाथने के कारण हुआ है नहीं तो पहले यह समतल खेत हुआ करता था) में अपनी बँसखट (बाँस की खाट) को खटमल से निजात पाने के लिए डाल आए थे। बरसात के मौसम की अभी शुरुवात होने की वजह से इस गड्ढे में जाँघभर ही पानी था। यह गड्ढा गाँव के बाहर एक ऐसे बड़े बगीचे के पास है जिसमें बहुत सारी झाड़ियाँ उग आई हैं और इसको भयावह बना दी हैं साथ ही साथ यह गड्ढा भी बरसात में चारों ओर से मूँज आदि बड़े खर-पतवारों से ढक जाता है।


दो-तीन दिन के बाद वे पंडीजी अपनी बँसखट (बाँस की खाट) को लाने के लिए उस गड्ढे की ओर बढ़े। लगभग साम के 5 बज रहे थे और कुछ चरवाहे अपने पशुओं को लेकर गाँव की ओर प्रस्थान कर दिए थे पर अभी भी कुछ छोटे बच्चे और एक-दो महिलाएँ उस गड्ढे के पास के बगीचे में बकरियाँ आदि चरा रही थीं।
ऐसी बात नहीं है कि वे पंडीजी बड़े डेराभूत (डरनेवाले) हैं। वे तो बड़े ही निडर और मेहनती व्यक्ति हैं। रात-रात को वे अकेले ही गाँव से दूर अपने खेतों में सोया करते थे, सिंचाई किया करते थे। पर पता नहीं क्यों उस दिन उस पंडीजी के मन में थोड़ा भय व्याप्त था। अभी पहले यह कहानी पूरी कर लेते हैं फिर उस पंडीजी से ही जानने की कोशिश करेंगे कि उस दिन उनके मन में भय क्यों व्याप्त था?


उस गड्ढे के पास पहुँचकर जब पंडीजी अपनी बँसखट (बाँस की खाट) निकालने के लिए पानी में घुसे तो अचानक उनको लगा की कोई उनको पानी के अंदर खींचने की कोशिश कर रहा है पर वे तबतक हाथ में अपनी खाट को उठा चुके थे। अरे यह क्या इसके बाद वे कुछ कर न सके और न चाहते हुए भी थोड़ा और पानी के अंदर खींच लिए गए। अभी वे कुछ सोंचते तभी एक बुड़ुआ चिल्लाया, "अरे! तुम लोग देखते क्या हो टूट पड़ो नहीं तो यह बचकर निकल जाएगा और अब यह अकेले मेरे बस में नहीं आ रहा है।" तबतक एक और बुड़ुआ जो सूअर के रूप में था चिल्लाया, "हम इसको कैसे पकड़े, इसके कंधे से तो जनेऊ झूल रहा है।" इतना सुनते ही जो बुड़ुआ पंडीजी से हाथा-पाई करते हुए उन्हें पानी में खींचकर डूबाने की कोशिश कर रहा था वह फौरन ही हाथ बढ़ाकर उस पंडीजी के जनेऊ (यज्ञोपवीत) को खींचकर तोड़ दिया।



जनेऊ टूटते ही लगभग आधा दरजन बुड़ुआ जो पहले से ही वहाँ मौजूद थे उस पंडीजी पर टूट पड़े। अब पंडीजी की हिम्मत और बल दोनों जवाब देने लगे और बुड़ुआ बीस पड़ गए। बुड़ुआओं ने पंडीजी को और अंदर खींच लिया और उनको लगे वहीं पानी में धाँसने। पंडीजी और बुड़ुआओं के बीच ये जो सीन चल रहा था वह किसी बकरी के चरवाहे बच्चे ने देख लिया और चिल्लाया की बीरेंदर बाबा पानी में डूब रहे हैं। अब सभी बच्चे चिल्लाने लगे तबतक बुड़ुआओं ने पंडीजी (बीरेंदर बाबा) को उल्टाकर के कींचड़ में उनका सर धाँस दिया था और धाँसते ही चले जा रहे थे। पानी के ऊपर अब रह-रहकर पंडीजी (बीरेंदर बाबा) का पैर ही कभी-कभी दिखाई पड़ जाता था।

बच्चों की चिल्लाहट सुनकर तभी हमारे गाँव के श्री नेपाल सिंह वहाँ आ गए और एक-आध बड़े बच्चों के साथ गड्ढे में घुस गए। गड्ढे में घुसकर उन्होंने अचेत पंडीजी (बीरेंदर बाबा) को बाहर निकाला। पंडीजी के मुँह, कान, आँख और सर आदि में पूरी तरह से कीचड़ लगी हुई थी। अबतक आलम यह था कि हमारा लगभग आधा गाँव उस गड्ढे के पास जमा हो गया था। आनन-फानन में उस पंडीजी को नहलाया गया और खाट पर सुलाकर ही घर लाया गया। कुछ लोगों को लग रहा था कि पंडीजी अब बचेंगे नहीं पर अभी भी उनकी सँसरी (साँस) चल रही थी। प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के डाक्टर आ चुके थे और पंडीजी का इलाज शुरु हो गया था। दो-तीन दिन तक पंडीजी (बीरेंदर बाबा) घर में खाट पर ही पड़े रहे और अक-बक बोलते रहे। 15-20 दिन के बाद धीरे-धीरे उनकी हालत में सुधार हुआ पर उनकी निडरता की वजह से उन पर इन दिनों में भूतों का छाया तो रहा पर कोई भूत (बुड़ुआ) उनपर हाबी नहीं हो पाया।


आज अगर कोई उस पंडीजी (बीरेंदर बाबा) से पूछता है कि उस दिन क्या हुआ था तो वे बताते हैं कि दरअसल इस घटना के लगभग एक हप्ते पहले से ही कुछ भूत उनके पीछे पड़ गए थे क्योंकि वे कई बार गाँव से दूर खेत-बगीचे आदि में सुर्ती या कलेवा आदि करते थे तो इन भूतों को नहीं चढ़ाते थे। इस कारण से कुछ भूत उनके पीछे ही लग गए थे जिसकी वजह से वे उन दिनों में थोड़ा डरे-सहमे हुए रहते थे।
पंडीजी आगे बताते हैं कि जो बुड़ुआ पहले उनको पकड़ा वह गुलाब (हमारे गाँव का ही एक ब्राह्मण कुमार जो एक बड़े पोखर में डूबकर मर गया था) था क्योंकि दूसरे किसी भी बुड़ुवे में मेरा जनेऊ तोड़ने की हिम्मत तो दूर पास आने की भी हिम्मत नहीं थी पर जब गुलाब (ब्राह्मण बुड़ुए का नाम) ने जनेऊ तोड़ दिया तो सभी बुड़ुओं ने हमला बोलकर मुझे धाँस दिया।

Monday, December 30, 2019

December 30, 2019

भानगढ़ का किला भारत की सबसे डरावनी जगहों में से एक है

आखिर किसलिए लोग भानगढ़ के किले मे जाने से डरते है । Why are people afraid to go to the fort of Bhangarh.




राजस्थान के जयपुर और अलवर के बीच पड़ने वाला भानगढ़ का किला भारत की सबसे डरावनी जगहों में से एक माभानगढ़ का किला भारत की सबसे डरावनी जगहों में से नी जाती है, इस जगह के बारे में लोगो का कहना है की रात के 12 बजे के बाद यहाँ पर भूतो का डेरा लगता है, और यहाँ पर कोई भी रात नहीं गुजार सकता क्योंकि जो भी यहाँ पर रात के वक्त रुकता है सुबह उसकी मौत हो जाती है, भानगढ़ के इस किले के उपर कई सारी टीवी सीरियल बन चुके हैं.



लोगो के मुताबिक 16वीं शताब्दी भानगढ़ में रहने वाला एक तांत्रिक जो की सिंघिया के नाम से जाना जाता था, उसको भानगढ़ की खूबसूरत राजकुमारी रत्नावती के साथ प्रेम हो गया था.


तांत्रिक किसी भी हालत में राजकुमारी को पाना चाहता था, पर वो कुछ नहीं कर सकता था, लेकिन एक दिन राजकुमारी की सहेली उनके लिए बाज़ार से केश-तेल लेने गयी जब वो तेल लेकर लौट रही थी तभी तांत्रिक ने उसमें काला-जादू कर दिया, ताकि राजकुमारी उसे लगाते ही भागी-भागी उसके पास आ जाये.


पर राजकुमारी को उसके टोटके के बारे में पता चल गया. राजकुमारी ने तेल ज़मीन पर गिरा दिया. कहते हैं तेल गिरते ही पत्थर के गोले में बदल गया और लुढकते हुए तांत्रिक की तरफ बढ़ा और उसे कुचल कर रख दिया. तांत्रिक इस बात से क्रोधित हो उठा उअर उसने मरते-मरते एक श्राप दिया कि भानगढ़ पूरा तबाह हो जाएगा और मरने वालों को मुक्ति नहीं मिलेगी….जल्द ही उसका श्राप सच साबित हुआ और भानगढ़ किला खण्डहरों में तब्दील हो गया.


आज भी लोगो का मानना है की यहाँ पर जो भी लोग मरे थे उन सबकी आत्मा ये यहाँ पर भटक रही है, और कई लोगो की यहाँ पर रात के वक्त मौत भी हो गयी है. जिसकी वजह से यहाँ पर भारतीय पुरातत्व विभाग ने बोर्ड भी लगा रखा है की शाम होने के बाद और सुबह होने से पहले इस किले में प्रवेश वर्जित है.

Sunday, December 29, 2019

December 29, 2019

एक लड़की की भटकती आत्मा यहा घटना पोरबंदर की है

एक लड़की की भटकती आत्मा, यह घटना पोरबंदर की है। The wandering soul of a girl, this incident is of Porbandar.


  यह सत्य घटना जो सोनल नाम की एक लड़की की है :-



यह घटना पोरबंदर की है। यह सत्य घटना सोनल नाम की एक लड़की की है। सोनल एक मध्यम वर्गीय परिवार में जन्मी और पली बढ़ी। अपने स्कूल के दिनो में सोनल काफी होशियार छात्रा रही। घर में माता पिता की हर बात मानना और घर-परिवार के काम काज में हाथ बटाना सोनल का स्वभाव था।


जब सोनल 12वी कक्षा में थी तब एक दिन अपनी सहेली के साथ पोरबंदर के समंदर किनारे घूमने गयी, समंदर किनारे दोनों सहेलियाँ पानी में पैर भिगोने और बाते करने में मस्त थीं। तभी अचानक समंदर की और से तेज हवा का झोंका सोनल की और आया और पलक जपकते ही वह हवा का झोंका जैसे उसके शरीर से आर-पार हो कर गुज़र गया। इस घटना से सोनल बुरी तरह डर गई, क्योंकि सोनल को उस हवा के झोंके के साथ हु-बहू अपने जैसी दिखने वाली लड़की भी दिखी थी, जो सोनल के शरीर के साथ टकरा कर सोनल के शरीर से आर-पार निकल गयी थी। उस वांकये के बाद सोनल की ज़िंदगी ही बदल गयी।

खाते पीते, सोते जागते, दिन, रात, सुबह शाम, सोनल को वह लड़की नज़र आने लगी। अपने जैसी दिखने वाली लड़की को देख कर सोनल खूब घबरा जाती, रोने लगती, और कई बार डर के मारे बीमार भी पड़ जाती। परिवार ने सोनल की तकलीफ दूर करने के लिए लाख जतन किए, पूजापाठ, हवन, दान धर्म, और अन्य कई सारे इलाज किए। पर कोई मरहम सोनल के काम ना आसका।

हद्द तो तब हो गयी जब सोनल अपने कॉलेज की पढ़ाई कर रही थी। शहर के कॉलेज के प्रोफ़ेसोर ऐसे कॉमेंट पास करने लगे थे के यह तो उसकी हूबहू कॉपी है। और सोनल को देख कर ऐसे अचंभित होने लगते के जेसे पुराना पाप सामने आने पर कोई पापी अचंभित हो जाता हो।

ऐसा कहा जाता है के आज से 35-40 साल पहले उसी कॉलेज में एक लड़की पढ़ती थी। और वह अचानक गायब हो गयी थी। माना जाता है कि कॉलेज प्रशासन से जुड़े कुछ लोगों ने उस कड़की को अगवाह कर के उसका बलात्कार कर के उसे मार दिया था। और उसके शरीर के कुछ टुकड़े कॉलेज की जमीन में दफना दिये थे। और कुछ समंदर किनारे फेंक दिये थे।

उसी लड़की की आत्मा सोनल को दिखती रहती है। और अपने लिए इंसाफ चाहती है। सोनल आज भी अपने जीवन में कभी कभी उस लड़की की परछाई देखने का अनुभव करती हैं। पर अब सोनल ने अपने डर का सामना करना सीख लिया है। और इस बात को समझ लिया है, कि अगर हकीकत में ऐसी कोई दुखदाई घटना उस लड़की के साथ हुई होगी, तो समय आने पर उस राज से परदा उठेगा। और दोषियों को सजा मिलेगी।
December 29, 2019

मुंबई की एक इमारत, जहा मौत करती है इन्सान का पीछा


मुंबई की एक इमारत, जहा मौत करती है इन्सान का पीछा :- A building in Mumbai, where death kills humans.



यहाँ एक सच्ची घाट है जो मुंबई एक इमारत में हुआ :- 





 मित्रो हमने अक्सर सुना है कि कभी कभी कोई घर या इमारत में कुछ ऐसे हादसे होते है जिसका पता नहीं लग पाता | कि उसको किसी प्रेत ने जकड़ रखा है या ये सब प्राकुतिक घटनाए है | हम अपने नए घर में प्रवेश से पहले इन्ही दुरात्माओ से बचने के लिए हवन यज्ञ करवाते है | आज हम आपको ऐसी ही एक इमारत के बारे में बतायेगे जहा मौत करती है इंसान का पीछा |





भारत की आर्थिक राजधानी के रूप में मशहूर मुंबई में ग्रांड पैराडी टॉवर Grand Paradi Tower Mumbai Haunted नाम की इमारत है इसका निर्माण 1976 में हुआ था | तब से लेकर आज तक यहा 20 से भी ज्यादा आत्महत्याओं के मामले सामने आये है | जिसने इस इमारत में रहने वाले वाशिंदों को दहशत में डाल रखा है | अधिकतर आत्महत्या के मामले इमारत की छत या खिड़की से कूदकर होने के सामने आये है | इन घटनाओ को ना केवल इन्टरनेट पर बल्कि देश के बड़े अखबारों में इस इमारत के बारे में बताया गया है | इन सारी घटनाओं की सच्चाई अभी तक कोई नहीं जान पाया इसलिए यहा होने वाली घटनाए लोगो के लिए एक रहस्य बना हुआ है |




 इन सब कारणों से इस इमारत को भारत की दस प्रेतबाधित स्थानों में से एक गिना जाता है | हमारे लिए ये सोचने की बात है कि अगर आत्महत्या का कोई कारण नहीं मिलता है तो क्या इस इमारत में कोई प्रेत का कब्ज़ा है जो यहा के निवासियों को मौत के घाट उतारता है | हमने अक्सर देखा या सुना होगा कि अगर किसी घर में प्रेत का वास हो वहा कोई इन्सान नहीं रह पाता | यहा की 8वी मंजिल पर अधिकतर इन घटनाओं का अंजाम होता है जो कि बड़ी अजीब तरीके से मौत के मामले सामने आये है| 2004 में एक बुजुर्ग दम्पति इस इमारत की खिड़की से कूद गए थे तब से यहा मौत का सिलसिला चालु हो गया |



उसके कुछ दिनों बाद उसके बच्चे और पोते भी उसी तरह इमारत से कूद गए | इसके बाद हर साल कोई ना कोई मामला सामने आता है | इसके लिए वहा के निवासियों ने यज्ञ हवन करवाया जिससे यहा मौत पर कुछ विराम तो लगा लेकिन आज भी उसकी 8वी मंजिल पर जाने से लोग कतराते है। 

Saturday, December 28, 2019

December 28, 2019

उस रात क्या हुआ अंकित के साथ खोफनाक रात

खोफनाक रात उस खोफनाक रात रात क्या हुआ अंकित के साथ :- What happened with Ankit on that night.


पुरुलिया  की यहाँ एक अलसुलझे रहस्य मे कहानी है जो अंकित के साथ घटना घाटी :-


पुरुलिया गांव में लड़का रहता था उसका नाम अंकित था वह लगभग 17 साल का था वह सरकारी नोकरी करता था एक रात वह ऑफिस से आ रहा था लगभग 10 बज रहा था. और सुनसान रोड हो
 गया उस हाइवे पर बगल में  श्मशान घाट था. जैसे ही वह श्मशान पार कर रहा था तब उसका मोटर-साइकिल का पेट्रोल अचानक खतम हो गया अब उसको समझ में नहीं अब में क्या करूँ उसके पास कोई चारा भी नहीं था बगल के श्मशान में से एक आजीव आवाज आ रही थी लड़की की रोने.




का तो कभी किसी की चिलाने की अंकित बहुत डर गया उसको कुछ समझ में नहीं आ रहा था की अब में क्या करूँ तब उसने देखा दूर से एक बस आ रही है उस समय लगभग 12 बज चुके था। उसने सोचा की यही अब ये उपाय बस उसके सामने खङी हो गई अंकित बोला “पुरुलिया” चलोगे कंडक्टर बोला बैठ जाईए। अंकित बोला मेरा मोटर-साइकिल भी है कंडक्टर बोला हम रख देते है आप बैठ जाईए अंकित सीट पर बैठ गया। बस खाली थी अंकित सोचने लगा एक आदमी मोटर-साइकिल बस के उपर कैसे रख सकता है तब वह सोचने लगा की तभी एक आदमी पीछे से अंकित के उपर 



हाथ रख केर बोला आपका घर कहा है” अंकित घबरा गया उसको पीछे देखने की दम नहीं था की वह पीछे देखे अंकित बहुत डर गया लगभग 1 बज गए थे। कंडक्टर बोले “आपका stop” आ गया है अंकित बस से उतरने लगा तभी वह बाहर की ओर देखा “मेरा मोटर-साइकिल कब नीचे उतारा गया” कंडक्टर बोला हम इसमे पेट्रोल भर दिये है।


अंकित वह से अपने घर चला गया कल सुबह उसको पता चला की वह बस में जो भी कुछ था “मारा हुआ था” अंकित इस बात से डर गया.

अब से अंकित उस हाइवे से नहीं जाता आता है उस रात से अंकित ने नोकरी छोर दिया।  

Thursday, December 26, 2019

December 26, 2019

अनसुलझे रहस्य या कोई पहेली जो एक लड़का के साथ हुआ :-

यहाँ एक अनसुलझे रहस्य  मे कहानी है  जो एक लड़का के साथ हुआ :- Here's the story in an unresolved mystery that happened to a boy.




आज विद्यालय से छुटकर घर की ओर जा रहा था। मन थोडा़ सा उदास था। चिंता सता रही थी कि वेतन अभी
तक मिला नहीं है। महीना समाप्त होने आ गया है। आजकल दुकानदार ने भी उधारी देना बंद कर दिया है। चिंता से मन व्याकुल था। दोपहर का समय और चिलचिलाती धूप से माथा ठनक रहा था। घर अभी दो किलोमीटर दूर था। सूनसान सड़क पर कोई वाहन भी नहीं कि उसे हात दिखाकर रोक लूँ। कदम पर कदम बढ़ाऐ चला रहा हूँ। सूनिल भी आज विद्यालय नहीं आया क्योंकि किसी काम से प्रधानाचार्य ने उन्हें बाहर भेज दिया था। वरना बाते

कलते ही आधा रास्ता तय हो जाता । सूनसान सड्क पर मानो एक अजीब सा ही सन्नाटा पसरा हुआ है। अचानक एक ठंडी हवा झोका आया और बदन मे एक सूकून सा मिला। साथ साथ एक हलकी सी खुशबू भी छा गई। मानो ताजे फूलों की है। पर रास्ते के दोनो तरफ ही खूला मैदान जिस्मे कि नमक की खेती होती है। आस पास कोई 


बगीचा भी नहीं पर खूशबू बडी ही मोहक थी। ऐसा लग रहा था मानो मेरे दाएँ तरफ से आ रही हो। मैने रुक कर अपनी दाएँ तरफ और पीछे की तरफ देखा। पर कोई भी नहीं था। पर एक ऐसा हलका अहसास हो रहा था जैसे कि कोई मेरे साथ साथ ही चल रहा हो। पर मैने इसे एक वैहम समझकर आगे बढ़ा। रास्ते मे एक कुत्ता दिखा जो अचानक ही मुझे देखकर भौंकने लगा। रोज तो यहीं से जाता हूँ पर कभी भौंका नहीं। आज इसे क्या हो गया है कि मुझे देखकर भौंके जा रहा है। मैने एक पत्थर उठाकर उसकी ओर फेंका उसे डराने के लिए। पर पत्थर बडी ही तेजी से उसे लगा और वह कुत्ता वहीं


 उलट गया और दर्द के मारे कराहने लगा। मैने तो इतने धीमे से पत्थर फेंका था कि उसके करीब भी नहीं पहुंचता वो पत्थर। पर रह इतने जोर से कैसे लग गया। मै भागकर उसकी ओर बढा़। उसे देखा तो कुत्ता मुझे देखकर भयभीत होने लगा। उसने ऊठकर मुझ पर झपट्टा मारा पर मेरे करीब आने के पहले ही दूसरी ओर जा गिरा। मुझे लगा, इस कुत्ते के करीब जाना मेरे लिए ठिक नहीं। मैने वहाँ से दौड़ लगाई। अब सड़क पर जल्दी
जल्दी चलने लगा। पता नहीं आज का दिन कैसा है मेरे साथ यह अजीबोगरीब घटना घट रही है। कुछ ही दूर चलने पर मेरा घर आ गया। मम्मी ने मेरे आता ही कहा, पगार मिला या खाली हात आया है। मैने मुँह लटकाकर कहा नहीं मिला आज। पर शायद कल जरूर मिल जाएगा। मम्मी ने गुस्से से कहा, क्या फायदा ऐसे नौकरी का


 जहाँ भूको मरना पड़े। स्कूल मे पढा़ने के बजाय कहीं मॉल मे झाडू पोछा भी करता तो पेट भर के रोटी नशीब होती। मैने कहा मम्मी ऐसा मत बोलो नौकरी अच्छी है सिरःफ पैसे कम हैं। जिस दिन अच्छे स्कूल मे नौकरी मिल जाएगी तो तकलीफ भी दूर हो जाएगी। मम्मी ने गुस्से से कहा, तो ठिक है जब तक अच्छा स्कूल नहीं मिल जाता

तब तक भूके पेट रहो । मैने कहा, क्यों घर मे कुछ नहीं है क्या? जा देख ले अगर मीला तो बना दुगीं। यह बोलकर मम्मी बडबडाते हुए बाहर चौखट पर जा बैठी। मैने रसोई घर मे जाकर देखा तो एक तरफ चावल की गोनी और डब्बे मे आटा भरा पड़ा है। टोकरी मे भरपूर सब्जी और फल रखें हुऐ है। मै हँसते हुए मम्मी के पास गया और.


पीछे से मम्मी को गले से लगाकर बोला,क्या मम्मी तू मुझे फंसा रही है घर मे तो करीब महीने भर का राशन है। मम्मी ने चिल्लाकर कहा, तेरी आँखे ही फूटी हुई है। मम्मी रशोईं घर मे गई कि मम्मी की मुँह से जैसे आवाज ही बंद हो गई। मम्मी ने बडे़ ही शांत भाव से कहा, यह राशन कहाँ से आया। अभी तो नहीं थे। मैने मम्मी से कहा, चिंता मत कर उधार लाई है तो ठिक है मै चुका दूगाँ पर अभी तो कुछ बना के खिला। मम्मी ने कहा, पर मैने यह राशन नहीं लाया। उधारी भी नहीं। राशन वाले के पास गई थी


पर उसने दिया नहीं। मैने कहा, पर तु गई थी ना इसलिए राशनवाला राशन छोड गया होगा। उसे तो पता ही है कि समय पर मै उसके पैसे दे देता हूँ। मम्मी अपने जिद्द पर थी पर मेरी भूक को देखकर रशोईं मे चली गई। मै बाहर आकर बैठा। पर वह मंद मंद फूलों की खुशबू अभी भी आ रही थी।

December 26, 2019

यहाँ राहुल के घर की सच्ची दिल दहलाने वाली घटना :-

यहाँ राहुल के घर की सच्ची दिल दहलाने वाली घटना - The real shocking incident of Rahul house here



ऐसी ही घटना घटी थी राहुल   के साथ जब वहाँ नया – नया घर में  शिफ्ट हुए थे यहाँ एक सच्ची घटना है



ये उस समय की बात है जब राहुल 10-वीं कक्षा में पढ़ता है और उसकी उम्र 16 साल की थी .
वह गरीब था वह हमेशा उदास रहता था। क्योकि बचपन में माँ – बाप गुजर गए थे उसी कारण वह उदास रहता था उसका घर छोटा और टूटा था. वह अपने घर में अकेले रहता था |


एक रात वह घर में टीo वीo देख रहा था उसको अचानक एक आवाज आया कोई उसका घर का दरवाजा कटखता रहा है उसने देखा बाहर जाकर देखा कोई वह नहीं था, फिर वह टीo वीo देखने लगा अचानक ''बिजली'' कट गई तब वह मोमबत्ती जला कर वह सो गया. 




दिन बीतता गया धीरे- धीरे वह बारा हो गया उसको सरकारी नोकरी लग गई. वह शहर में एक फ्लॅट खरीद लिया वह रेस्टुरेंट में खाना खाता था एक रात को वह रेस्टुरेंट से आ रहा था लगभग 10 बजे सुनसान रोड से उसको अचानक लगा की कोई मेरे पीछे से आ रहा है. तब वह भागते भागते अपने घर चल गया वह सोने गया तो उसको एक पायल की आवाज सुनाई दी। और आवाज बंद हो गई।



वहाँ उठ गया और देखने लगा अपने आस – पास में फिर से आवाज उसे सुनाई दी और फिर आवाज बंद हो गई उसको लगा की कोई सपना तो नहीं तब वहाँ वास रूम में गया लगभग 12 बज रहे थे वह सीसे में देखा की कोई पीछे है वहाँ बहुत दर गया |


कल  सुबह वहाँ तैयार होकर जाने लगा तब उसे रास्ते में एक संजय नामक एक आदमी मिला और उससे पीछा राहुल से
अरे भाई आप क्या इस फ्लॅट में रहते हो राहुल बोला हाँ, वह  संजय बोला की आपको इस फ्लॅट में कुछ महसूस हुआ, राहुल घबरा के बोला हाँ मुझे कल पायल की आवाज सुनाई दी और मुझे बहुत दर लग रहा था, आदमी बोला उस फ्लॅट में आजतक कोई नहीं जाता उस फ्लॅट में 6 आत्मा रहती है | 


आजतक उसमे कोई नहीं जाता है राहुल का होस उर गया राहुल बोला उस फ्लॅट में क्या हुआ था संजय बोला सन 1972 की बात है जब उस फ्लॅट में आग लगने से एक ही परिवार के लोग मर गए में उसी कारण से लोग उस फ्लॅट में जाने से डरते है, संजय बोला अब में चलता हुई। राहुल अब उस फ्लॅट को छोङकर जाने लगा.


राहुल अब बाहर कमाने लगा फिर उसका सादी हो गया वह सुख से जीने लगा।