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Wednesday, January 8, 2020

January 08, 2020

Room No.13 की एक अनसुलझे रहस्यम कहानी

यहा एक सच्ची कहानी जब Room No. 13 मे आज तक कोई नहीं जाता आता है :- Here is a true story when no one comes to room NO. 13. 



मै आपको अपने मित्र नीलेश की बहन नीलिमा और उसकी साली नीतू की आप बीती आप लोगो को बताना चाहती हु | कुछ दिनों पहले नीलेश ने मुझे बताया था कि उसकी बहन की मौत हो गयी है ये सुनकर मै बहुत दुखी हो गयी और मैंने उसकी मौत का कारण पूछा तो उसने पुरी घटना मुझे सुनाई | कुछ दिनों पहले नीलेश उसकी बहन नीलिमा और साली नीतू के साथ कही घुमने गये थे | नीलेश की बहन और नीतू दोनों बहुत अच्छी दोस्त थी |


लौटते वक़्त काफी रात हो गयी थी | रास्ते में उसकी बहन की तबियत खराब हो गयी थी उसे काफी ठण्ड लग रही थी | हमारा घर अभी भी 100 किमी दूर था और रास्ते में कोई भी रुकने की जगह नहीं मिल रही थी | थोड़ी देर के बाद हमे एक होटल दिखाई दी तो नीतू ने होटल में रुककर उसकी बहन को आराम देने को कहा|  उस होटल के काउंटर पर हमने जब रूम के लिए पुछा तो उसने बताया कि सभी रूम फुल थे क्योंकि उस रास्ते पर केवल वही एक ढंग की होटल थी | लेकिन तभी होटल के मेनेजर ने बताया कि एक रूम खाली था

Room No.13

हमने उस समय अन्धविश्वासी वाली बातो को ना सोचकर रूम ले लिया | जैसा कि आप लोग जानते है कि रूम न०. 13 को अशुभ माना जाता है और कई होटलों में इस नंबर का कोई रूम नहीं होता है लेकिन ये होटल कई साल पुराना था |  जैसे ही वो तीनो उस रूम में गये तो उन्हें नेगेटिव एनर्जी महसूस हुई | उस रूम की कंडीशन तो ठीक थी लेकिन ऐसा लग रहा था जैसे बरसों से यहा कोई रहने नहीं आया हो |उन्होंने कुछ ज्यादा नहीं सोचा | अब वो अपनी बहन नीलिमा के लिए काउंटर से पैनकिलर लेने को गया | काउंटर से टेबलेट लेकर जैसे ही रूम में आया तो देखा कि उसकी बहन बालकनी में खडी बाते कर रही थी नीलेश में सोचा नीतू और उसकी बहन दोनों बालकनी में बाते कर रही है लेकिन जैसे ही उसके पास गया तो उसकी बहन के अलावा कोई नहीं था |


उसने उसकी बहन से पुछा कि तुम किससे बाते कर रही थी तो उसने सिर्फ सर हिला कर मना कर दिया | तभी नीतू वाशरूम से आयी |  नीलेश घबरा गया की अगर नीतू वाशरूम में थी तो नीलिमा किससे बात कर रही थी | नीलेश ने नीलिमा को टेबलेट दी और सो जाने को कहा |अब नीतू और नीलिमा दोनों बेड पर सो गये और नीलेश सोफे पर सो गया | सुबह जब क्लीनर कमरे की सफाई के लिए आया तो दरवाज़ा खुला था | और वो जब अंदर आया तो देखा की कमरे में खून की खून था और नीलिमा मर चुकी थी | क्लीनर जोर से चिल्लाया तो मेरी नींद खुल गयी और देखा कि नीलिमा की मौत हो चुकी थी और नीतू बेहोश हो गयी थी | नीलेश जोर जोर से रोने लगा और मेनेजर को बुलाया |  मेनेजर ने तुरंत एम्बुलेंस को बुलाया और दोनों को हॉस्पिटल ले गये |



नीलिमा तो मर चुकी थी लेकिन नीतू को थोड़ी देर में होश आ गया |जैसे ही नीतू को होश आया तो उसके पीछे उसकी बहन की आत्मा थी जो उससे बोल रही थी “तूने मुझे मार दिया ” | यह कहकर वो गायब हो गयी |नीलिमा काफी बुरी तरह डर गयी अब नीलेश में नीतू से सारी घटना पूछी तो उसने बताया कि “रात को जब मै पानी पीने उठी रात तो देखा नीतू फिर से बालकनी में बैठी थी और कुछ बडबडा रही थी और मै जैसे उसके पास गयी और उससे पूछा कि वो यहा क्या कर रही है तो उसने मुझे जोर से धक्का दिया और मेरा सर दीवार से टकरा गया और मै बेहोश हो गयी और इसके अलावा मुझे कुछ याद नहीं है

जैसे ही नीतू हॉस्पिटल से छुटी तो वो नीलेश के साथ उस होटल में गयी और उसने काउंटर पर मेनेजर से बात करने को कहा तो उसने बताया की आपकी घटना के दुसरे दिन मेनेजर की मौत हो गयी थी | वो दोनों शॉक हो गये |उन्होंने क्लीनर से माजरा समझने की कोशिश की तो उसने बताया कि आप जिस रूम में रुके थे वो प्रेतबाधित था और रात में वहा कोई नहीं रुकता है लेकिन मेनेजर ने पैसो के चक्कर में रूम आपको दे दिया | इस रूम में पहले भी दो मौते हो चुकी है | अब सारी बात नीलेश को समझ में आयी |

इस घटना के बाद नीलेश काफी सदमे में चला गया और कभी किसी होटल में नहीं रुका | 

Saturday, January 4, 2020

January 04, 2020

यहा एक सच्ची कहानी है जो मेरे दोस्त के साथ घाटी

यहा घटना एक सच्ची है, जो की मेरे राहुल दोस्त के साथ घाटी :- The incident here is a true one, that Valley with my Rahul friend.



मेरा नाम राहुल  है। और में जामनगर शहर में रहती हूँ। मै एक टीचर हूँ। मुजे बचपन से ही तैराकी का जबरा शौख रहा है। बचपन में हम जब खंभालिया तालुके में रहते थे, तभी पिताजी मुजे और मेरी बहन प्रीती को नदी पर तैरना सिखाने ले जाते थे।


रामनाथ मंदिर के पास बहने वाली “घी नदी” साल के नौ महीने पानी से लबरेज़ (भरपूर) रहती है। उनही दिनों नदी में तैराकी करते वक्त मै एक भयानक एहसास से गुजरी थी। जिसने मेरी जिंदगी बदल कर रख दी। मेरे साथ वह दर्दनाक हाथसा हुआ तब में सोलह साल की थी। और ग्यारहवि कक्षा में थी।


वह के सामान्य दिन था, रोज़ की तरह मै मेरी बहन प्रीती और पापा नदी पर गए। उस दिन पानी काफी ठंडा था। इस लिए पापा ने मुजे और प्रीती को कमर से ज्यादा गहरे पानी मै जाने से मना किया था। और वह खुद नदी के पास स्थित रामनाथ मंदिर में दर्शन करने चले गए।


मै और प्रीती पानी में उतरी और हसी मज़ाक करते हुए तैराकी करने लगी। तभी अचानक मुजे महसूस हुआ की मेरी बहन प्रीती मुजसे दूर थोड़े गहरे पानी में जाने लगी। मै फौरन उस पर चिल्लाई, पर वह फिर भी आगे ही आगे गहरे पानी में जाने लगी।


मै प्रीती को पकड़ के वापीस लाने उसके पीछे पीछे गहरे पानी में जाने लगी। अब पानी मेरे गले तक था। अचानक प्रीती मेरी आँखों से औजल (गायब) हो गयी। मुजे लगा वह डूब गयी। और तब खौफ के मारे, मेरी विकराल चीख निकल गयी। तभी अचानक प्रीती पानी से बाहर आई और मुजे देख कर हंसने लगी। मैने पानी में ही तैरते तैरते उसे ज़ोर का लाफा मार दिया… और उसके बाद जो हुआ उस मंज़र को देख कर मेरी रूह कांप गयी।


प्रीती मुजे घूरने लगी… और प्रीती पानी में तैरते हुए पानी में ऊपर उठने लगी… वह कमर तक पानी से ऊपर उठ गयी… गले तक गहरे पानी में तैरते हुए किसी इन्सान का ऐसा करना नामुमकिन होता है, यह मुजे पता था। फौरन में समज गयी की मेरी जान आफत में है।


तभी यक यक मेरी नज़र नदी किनारे पर पड़ी… मैने देखा की नदी किनारे मेरे पिता और मेरी बहन प्रीती खड़े हैं। और मेरी और देख कर चिल्ला रहे हैं। अब मै उस पानी मै ऊपर उठे हुए भूत की और देखना भी नहीं चाहती थी, क्यूँ की मुजे पता चल गया था की उसने मेरी छोटी बहन का रूप ले कर मुजे गहरे पानी में लाने का जाल बिछाया था। मै एक गहरी साँस भर के, ज़ोर लगाते हुए, डरते कांपते किनारे की और तैरने लगी। पर वह ज़ालिम भूतनी कहाँ मुजे इतनी जल्दी छौड्ने वाली थी। उसने अपना असली रूप दिखाया और घूम कर मेरे सामने आ खड़ी हुई।


उसके मुह से मांस लटक रहा था। दाँत उसके काले और नुकीले थे। और उसके बालों में कीड़े लगे थे। आंखे खून भरी लाल थी। और वह भूतनी मुजे ऐसे देख रही थी जैसे वह मुजे खा ही जाएगी। मेर हाथ पैर उसे देख कर, डर के मारे जमने लगे थे। फिर भी मैने उस भूतनी के पास से घुमाव ले कर, तैर कर किनारे की और तैर कर भागने की कौसिस की। पर उसने पानी में जा कर मेरा एक पैर पकड़ लिया।


उसकी पकड़ आज भी मुजे याद है। जेसे किसी गरम लोहे की जंजीर ने जकड़ रखा हो। जैसे ही उसने मेरा पैर पकड़ा मेरी हिम्मत जवाब दे गयी। और मैने पानी में तैरना छौड़ दिया। और आने वाली दर्द नाक मौत के लिए मै खूद को तयार करने लगी। दो तीन बार मै पानी के अंदर बाहर हुई। तभी अचानक मेरे हाथ को किसी ने कस कर पकड़ा और वह पवन की रफ्तार से खींच कर मुजे किनारे की और बहाने लगा। और उसी वक्त, तुरंत ही मेरे पैर की पकड़ भी छूट गयी। मुजे जब हौश आया तो मै नदी किनारे पड़ी थी। और मेरे पापा और प्रीती पास बैठ कर मुजे हौश मै लाने की कौशीस कर रहे थे।


“प्रीती ने कहा की वह कभी गहरे पानी की और गयी ही नहीं थी। मेरे पापा ने कहा की उसे पानी में कोई भूतनी मेरे सामने खड़ी दिखी ही नहीं। पापा ने कहा की गहरे पानी से नदी की और में खुद बह कर आई, उन्होने मुजे ना तो खुद बचाया था, नाहीं किसी और को मुजे नदी किनारे वापीस खिचते हुए देखा।”

“शायद उस पानी में एक बुरी शक्ति थी जो मेरा भोग लेना चाहती थी। और वहीं पर एक भली शक्ति थी जिसने मुजे उस भूतनी के चंगुल से छुड़ा कर किनारे पर ला फेंका।“

Tuesday, December 31, 2019

December 31, 2019

यह एक रहस्य मे कहानी है भूतो की अनोखी कहानी


यह एक रहस्य मे कहानी है भूतो की अनोखी कहानी :- This is a mystery story, a unique story of ghosts.




भूत भी कई प्रकार के होते हैं। आज मैं भूतों की जो कहानी सुनाने जा रहा हूँ ओ बुड़ुआओं (एक प्रकार के भूत) के बारे में है। जब कोई व्यक्ति किसी कारण बस पानी में डूबकर मर जाता है तो वह बुड़ुआ बन जाता है। बुड़ुआ बहुत ही खतरनाक होते हैं पर इनका बस केवल पानी में ही चलता है वह भी डूबाहभर (जिसमें कोई डूब सकता हो) पानी में।

हमारे तरफ गाँवों में जब खाटों (खटिया) में बहुत ही खटमल पड़ जाते हैं और खटमलमार दवा डालने के बाद भी वे नहीं मरते तो लोगों के पास इन रक्तचूषक प्राणियों से बचने का बस एक ही रास्ता बचता है और वह यह कि उस खटमली खाट को किसी तालाब, खंता (गड्ढा) आदि में पानी में डूबो दिया जाए। जब वह खटमली खाट 2-3 दिनतक पानी में ही छोड़ दी जाती है तो ये रक्तचूषक प्राणी या तो पानी में डूबकर मर जाते हैं या अपना रास्ता नाप लेते हैं और वह खाट पूरी तरह से खटमल-फ्री हो जाती है।


एकबार की बात है कि हमारे गाँव के ही एक पंडीजी एक गड्ढे (इस गड्ढे का निर्माण चिमनी के लिए ईंट पाथने के कारण हुआ है नहीं तो पहले यह समतल खेत हुआ करता था) में अपनी बँसखट (बाँस की खाट) को खटमल से निजात पाने के लिए डाल आए थे। बरसात के मौसम की अभी शुरुवात होने की वजह से इस गड्ढे में जाँघभर ही पानी था। यह गड्ढा गाँव के बाहर एक ऐसे बड़े बगीचे के पास है जिसमें बहुत सारी झाड़ियाँ उग आई हैं और इसको भयावह बना दी हैं साथ ही साथ यह गड्ढा भी बरसात में चारों ओर से मूँज आदि बड़े खर-पतवारों से ढक जाता है।


दो-तीन दिन के बाद वे पंडीजी अपनी बँसखट (बाँस की खाट) को लाने के लिए उस गड्ढे की ओर बढ़े। लगभग साम के 5 बज रहे थे और कुछ चरवाहे अपने पशुओं को लेकर गाँव की ओर प्रस्थान कर दिए थे पर अभी भी कुछ छोटे बच्चे और एक-दो महिलाएँ उस गड्ढे के पास के बगीचे में बकरियाँ आदि चरा रही थीं।
ऐसी बात नहीं है कि वे पंडीजी बड़े डेराभूत (डरनेवाले) हैं। वे तो बड़े ही निडर और मेहनती व्यक्ति हैं। रात-रात को वे अकेले ही गाँव से दूर अपने खेतों में सोया करते थे, सिंचाई किया करते थे। पर पता नहीं क्यों उस दिन उस पंडीजी के मन में थोड़ा भय व्याप्त था। अभी पहले यह कहानी पूरी कर लेते हैं फिर उस पंडीजी से ही जानने की कोशिश करेंगे कि उस दिन उनके मन में भय क्यों व्याप्त था?


उस गड्ढे के पास पहुँचकर जब पंडीजी अपनी बँसखट (बाँस की खाट) निकालने के लिए पानी में घुसे तो अचानक उनको लगा की कोई उनको पानी के अंदर खींचने की कोशिश कर रहा है पर वे तबतक हाथ में अपनी खाट को उठा चुके थे। अरे यह क्या इसके बाद वे कुछ कर न सके और न चाहते हुए भी थोड़ा और पानी के अंदर खींच लिए गए। अभी वे कुछ सोंचते तभी एक बुड़ुआ चिल्लाया, "अरे! तुम लोग देखते क्या हो टूट पड़ो नहीं तो यह बचकर निकल जाएगा और अब यह अकेले मेरे बस में नहीं आ रहा है।" तबतक एक और बुड़ुआ जो सूअर के रूप में था चिल्लाया, "हम इसको कैसे पकड़े, इसके कंधे से तो जनेऊ झूल रहा है।" इतना सुनते ही जो बुड़ुआ पंडीजी से हाथा-पाई करते हुए उन्हें पानी में खींचकर डूबाने की कोशिश कर रहा था वह फौरन ही हाथ बढ़ाकर उस पंडीजी के जनेऊ (यज्ञोपवीत) को खींचकर तोड़ दिया।



जनेऊ टूटते ही लगभग आधा दरजन बुड़ुआ जो पहले से ही वहाँ मौजूद थे उस पंडीजी पर टूट पड़े। अब पंडीजी की हिम्मत और बल दोनों जवाब देने लगे और बुड़ुआ बीस पड़ गए। बुड़ुआओं ने पंडीजी को और अंदर खींच लिया और उनको लगे वहीं पानी में धाँसने। पंडीजी और बुड़ुआओं के बीच ये जो सीन चल रहा था वह किसी बकरी के चरवाहे बच्चे ने देख लिया और चिल्लाया की बीरेंदर बाबा पानी में डूब रहे हैं। अब सभी बच्चे चिल्लाने लगे तबतक बुड़ुआओं ने पंडीजी (बीरेंदर बाबा) को उल्टाकर के कींचड़ में उनका सर धाँस दिया था और धाँसते ही चले जा रहे थे। पानी के ऊपर अब रह-रहकर पंडीजी (बीरेंदर बाबा) का पैर ही कभी-कभी दिखाई पड़ जाता था।

बच्चों की चिल्लाहट सुनकर तभी हमारे गाँव के श्री नेपाल सिंह वहाँ आ गए और एक-आध बड़े बच्चों के साथ गड्ढे में घुस गए। गड्ढे में घुसकर उन्होंने अचेत पंडीजी (बीरेंदर बाबा) को बाहर निकाला। पंडीजी के मुँह, कान, आँख और सर आदि में पूरी तरह से कीचड़ लगी हुई थी। अबतक आलम यह था कि हमारा लगभग आधा गाँव उस गड्ढे के पास जमा हो गया था। आनन-फानन में उस पंडीजी को नहलाया गया और खाट पर सुलाकर ही घर लाया गया। कुछ लोगों को लग रहा था कि पंडीजी अब बचेंगे नहीं पर अभी भी उनकी सँसरी (साँस) चल रही थी। प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के डाक्टर आ चुके थे और पंडीजी का इलाज शुरु हो गया था। दो-तीन दिन तक पंडीजी (बीरेंदर बाबा) घर में खाट पर ही पड़े रहे और अक-बक बोलते रहे। 15-20 दिन के बाद धीरे-धीरे उनकी हालत में सुधार हुआ पर उनकी निडरता की वजह से उन पर इन दिनों में भूतों का छाया तो रहा पर कोई भूत (बुड़ुआ) उनपर हाबी नहीं हो पाया।


आज अगर कोई उस पंडीजी (बीरेंदर बाबा) से पूछता है कि उस दिन क्या हुआ था तो वे बताते हैं कि दरअसल इस घटना के लगभग एक हप्ते पहले से ही कुछ भूत उनके पीछे पड़ गए थे क्योंकि वे कई बार गाँव से दूर खेत-बगीचे आदि में सुर्ती या कलेवा आदि करते थे तो इन भूतों को नहीं चढ़ाते थे। इस कारण से कुछ भूत उनके पीछे ही लग गए थे जिसकी वजह से वे उन दिनों में थोड़ा डरे-सहमे हुए रहते थे।
पंडीजी आगे बताते हैं कि जो बुड़ुआ पहले उनको पकड़ा वह गुलाब (हमारे गाँव का ही एक ब्राह्मण कुमार जो एक बड़े पोखर में डूबकर मर गया था) था क्योंकि दूसरे किसी भी बुड़ुवे में मेरा जनेऊ तोड़ने की हिम्मत तो दूर पास आने की भी हिम्मत नहीं थी पर जब गुलाब (ब्राह्मण बुड़ुए का नाम) ने जनेऊ तोड़ दिया तो सभी बुड़ुओं ने हमला बोलकर मुझे धाँस दिया।

Sunday, December 29, 2019

December 29, 2019

मुंबई की एक इमारत, जहा मौत करती है इन्सान का पीछा


मुंबई की एक इमारत, जहा मौत करती है इन्सान का पीछा :- A building in Mumbai, where death kills humans.



यहाँ एक सच्ची घाट है जो मुंबई एक इमारत में हुआ :- 





 मित्रो हमने अक्सर सुना है कि कभी कभी कोई घर या इमारत में कुछ ऐसे हादसे होते है जिसका पता नहीं लग पाता | कि उसको किसी प्रेत ने जकड़ रखा है या ये सब प्राकुतिक घटनाए है | हम अपने नए घर में प्रवेश से पहले इन्ही दुरात्माओ से बचने के लिए हवन यज्ञ करवाते है | आज हम आपको ऐसी ही एक इमारत के बारे में बतायेगे जहा मौत करती है इंसान का पीछा |





भारत की आर्थिक राजधानी के रूप में मशहूर मुंबई में ग्रांड पैराडी टॉवर Grand Paradi Tower Mumbai Haunted नाम की इमारत है इसका निर्माण 1976 में हुआ था | तब से लेकर आज तक यहा 20 से भी ज्यादा आत्महत्याओं के मामले सामने आये है | जिसने इस इमारत में रहने वाले वाशिंदों को दहशत में डाल रखा है | अधिकतर आत्महत्या के मामले इमारत की छत या खिड़की से कूदकर होने के सामने आये है | इन घटनाओ को ना केवल इन्टरनेट पर बल्कि देश के बड़े अखबारों में इस इमारत के बारे में बताया गया है | इन सारी घटनाओं की सच्चाई अभी तक कोई नहीं जान पाया इसलिए यहा होने वाली घटनाए लोगो के लिए एक रहस्य बना हुआ है |




 इन सब कारणों से इस इमारत को भारत की दस प्रेतबाधित स्थानों में से एक गिना जाता है | हमारे लिए ये सोचने की बात है कि अगर आत्महत्या का कोई कारण नहीं मिलता है तो क्या इस इमारत में कोई प्रेत का कब्ज़ा है जो यहा के निवासियों को मौत के घाट उतारता है | हमने अक्सर देखा या सुना होगा कि अगर किसी घर में प्रेत का वास हो वहा कोई इन्सान नहीं रह पाता | यहा की 8वी मंजिल पर अधिकतर इन घटनाओं का अंजाम होता है जो कि बड़ी अजीब तरीके से मौत के मामले सामने आये है| 2004 में एक बुजुर्ग दम्पति इस इमारत की खिड़की से कूद गए थे तब से यहा मौत का सिलसिला चालु हो गया |



उसके कुछ दिनों बाद उसके बच्चे और पोते भी उसी तरह इमारत से कूद गए | इसके बाद हर साल कोई ना कोई मामला सामने आता है | इसके लिए वहा के निवासियों ने यज्ञ हवन करवाया जिससे यहा मौत पर कुछ विराम तो लगा लेकिन आज भी उसकी 8वी मंजिल पर जाने से लोग कतराते है। 

Saturday, December 28, 2019

December 28, 2019

उस रात क्या हुआ अंकित के साथ खोफनाक रात

खोफनाक रात उस खोफनाक रात रात क्या हुआ अंकित के साथ :- What happened with Ankit on that night.


पुरुलिया  की यहाँ एक अलसुलझे रहस्य मे कहानी है जो अंकित के साथ घटना घाटी :-


पुरुलिया गांव में लड़का रहता था उसका नाम अंकित था वह लगभग 17 साल का था वह सरकारी नोकरी करता था एक रात वह ऑफिस से आ रहा था लगभग 10 बज रहा था. और सुनसान रोड हो
 गया उस हाइवे पर बगल में  श्मशान घाट था. जैसे ही वह श्मशान पार कर रहा था तब उसका मोटर-साइकिल का पेट्रोल अचानक खतम हो गया अब उसको समझ में नहीं अब में क्या करूँ उसके पास कोई चारा भी नहीं था बगल के श्मशान में से एक आजीव आवाज आ रही थी लड़की की रोने.




का तो कभी किसी की चिलाने की अंकित बहुत डर गया उसको कुछ समझ में नहीं आ रहा था की अब में क्या करूँ तब उसने देखा दूर से एक बस आ रही है उस समय लगभग 12 बज चुके था। उसने सोचा की यही अब ये उपाय बस उसके सामने खङी हो गई अंकित बोला “पुरुलिया” चलोगे कंडक्टर बोला बैठ जाईए। अंकित बोला मेरा मोटर-साइकिल भी है कंडक्टर बोला हम रख देते है आप बैठ जाईए अंकित सीट पर बैठ गया। बस खाली थी अंकित सोचने लगा एक आदमी मोटर-साइकिल बस के उपर कैसे रख सकता है तब वह सोचने लगा की तभी एक आदमी पीछे से अंकित के उपर 



हाथ रख केर बोला आपका घर कहा है” अंकित घबरा गया उसको पीछे देखने की दम नहीं था की वह पीछे देखे अंकित बहुत डर गया लगभग 1 बज गए थे। कंडक्टर बोले “आपका stop” आ गया है अंकित बस से उतरने लगा तभी वह बाहर की ओर देखा “मेरा मोटर-साइकिल कब नीचे उतारा गया” कंडक्टर बोला हम इसमे पेट्रोल भर दिये है।


अंकित वह से अपने घर चला गया कल सुबह उसको पता चला की वह बस में जो भी कुछ था “मारा हुआ था” अंकित इस बात से डर गया.

अब से अंकित उस हाइवे से नहीं जाता आता है उस रात से अंकित ने नोकरी छोर दिया।  

Thursday, December 26, 2019

December 26, 2019

अनसुलझे रहस्य या कोई पहेली जो एक लड़का के साथ हुआ :-

यहाँ एक अनसुलझे रहस्य  मे कहानी है  जो एक लड़का के साथ हुआ :- Here's the story in an unresolved mystery that happened to a boy.




आज विद्यालय से छुटकर घर की ओर जा रहा था। मन थोडा़ सा उदास था। चिंता सता रही थी कि वेतन अभी
तक मिला नहीं है। महीना समाप्त होने आ गया है। आजकल दुकानदार ने भी उधारी देना बंद कर दिया है। चिंता से मन व्याकुल था। दोपहर का समय और चिलचिलाती धूप से माथा ठनक रहा था। घर अभी दो किलोमीटर दूर था। सूनसान सड़क पर कोई वाहन भी नहीं कि उसे हात दिखाकर रोक लूँ। कदम पर कदम बढ़ाऐ चला रहा हूँ। सूनिल भी आज विद्यालय नहीं आया क्योंकि किसी काम से प्रधानाचार्य ने उन्हें बाहर भेज दिया था। वरना बाते

कलते ही आधा रास्ता तय हो जाता । सूनसान सड्क पर मानो एक अजीब सा ही सन्नाटा पसरा हुआ है। अचानक एक ठंडी हवा झोका आया और बदन मे एक सूकून सा मिला। साथ साथ एक हलकी सी खुशबू भी छा गई। मानो ताजे फूलों की है। पर रास्ते के दोनो तरफ ही खूला मैदान जिस्मे कि नमक की खेती होती है। आस पास कोई 


बगीचा भी नहीं पर खूशबू बडी ही मोहक थी। ऐसा लग रहा था मानो मेरे दाएँ तरफ से आ रही हो। मैने रुक कर अपनी दाएँ तरफ और पीछे की तरफ देखा। पर कोई भी नहीं था। पर एक ऐसा हलका अहसास हो रहा था जैसे कि कोई मेरे साथ साथ ही चल रहा हो। पर मैने इसे एक वैहम समझकर आगे बढ़ा। रास्ते मे एक कुत्ता दिखा जो अचानक ही मुझे देखकर भौंकने लगा। रोज तो यहीं से जाता हूँ पर कभी भौंका नहीं। आज इसे क्या हो गया है कि मुझे देखकर भौंके जा रहा है। मैने एक पत्थर उठाकर उसकी ओर फेंका उसे डराने के लिए। पर पत्थर बडी ही तेजी से उसे लगा और वह कुत्ता वहीं


 उलट गया और दर्द के मारे कराहने लगा। मैने तो इतने धीमे से पत्थर फेंका था कि उसके करीब भी नहीं पहुंचता वो पत्थर। पर रह इतने जोर से कैसे लग गया। मै भागकर उसकी ओर बढा़। उसे देखा तो कुत्ता मुझे देखकर भयभीत होने लगा। उसने ऊठकर मुझ पर झपट्टा मारा पर मेरे करीब आने के पहले ही दूसरी ओर जा गिरा। मुझे लगा, इस कुत्ते के करीब जाना मेरे लिए ठिक नहीं। मैने वहाँ से दौड़ लगाई। अब सड़क पर जल्दी
जल्दी चलने लगा। पता नहीं आज का दिन कैसा है मेरे साथ यह अजीबोगरीब घटना घट रही है। कुछ ही दूर चलने पर मेरा घर आ गया। मम्मी ने मेरे आता ही कहा, पगार मिला या खाली हात आया है। मैने मुँह लटकाकर कहा नहीं मिला आज। पर शायद कल जरूर मिल जाएगा। मम्मी ने गुस्से से कहा, क्या फायदा ऐसे नौकरी का


 जहाँ भूको मरना पड़े। स्कूल मे पढा़ने के बजाय कहीं मॉल मे झाडू पोछा भी करता तो पेट भर के रोटी नशीब होती। मैने कहा मम्मी ऐसा मत बोलो नौकरी अच्छी है सिरःफ पैसे कम हैं। जिस दिन अच्छे स्कूल मे नौकरी मिल जाएगी तो तकलीफ भी दूर हो जाएगी। मम्मी ने गुस्से से कहा, तो ठिक है जब तक अच्छा स्कूल नहीं मिल जाता

तब तक भूके पेट रहो । मैने कहा, क्यों घर मे कुछ नहीं है क्या? जा देख ले अगर मीला तो बना दुगीं। यह बोलकर मम्मी बडबडाते हुए बाहर चौखट पर जा बैठी। मैने रसोई घर मे जाकर देखा तो एक तरफ चावल की गोनी और डब्बे मे आटा भरा पड़ा है। टोकरी मे भरपूर सब्जी और फल रखें हुऐ है। मै हँसते हुए मम्मी के पास गया और.


पीछे से मम्मी को गले से लगाकर बोला,क्या मम्मी तू मुझे फंसा रही है घर मे तो करीब महीने भर का राशन है। मम्मी ने चिल्लाकर कहा, तेरी आँखे ही फूटी हुई है। मम्मी रशोईं घर मे गई कि मम्मी की मुँह से जैसे आवाज ही बंद हो गई। मम्मी ने बडे़ ही शांत भाव से कहा, यह राशन कहाँ से आया। अभी तो नहीं थे। मैने मम्मी से कहा, चिंता मत कर उधार लाई है तो ठिक है मै चुका दूगाँ पर अभी तो कुछ बना के खिला। मम्मी ने कहा, पर मैने यह राशन नहीं लाया। उधारी भी नहीं। राशन वाले के पास गई थी


पर उसने दिया नहीं। मैने कहा, पर तु गई थी ना इसलिए राशनवाला राशन छोड गया होगा। उसे तो पता ही है कि समय पर मै उसके पैसे दे देता हूँ। मम्मी अपने जिद्द पर थी पर मेरी भूक को देखकर रशोईं मे चली गई। मै बाहर आकर बैठा। पर वह मंद मंद फूलों की खुशबू अभी भी आ रही थी।