The Real Story of Horror, Most Real - Life Ghost Stories From Real People, Real Life Events, These Horror Stories Aren't For The Faint of Heart, Comedy Horror stories & Other Funny Story

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Friday, January 3, 2020

January 03, 2020

सात खूनी दरवाजों का खोफनाक रास्ता

यहा एक गांव की घटना है जहां एक घर की एक अनोखी दरवाजा :- Here is a village incident where a unique door of a house.




आज से 50 साल पहले डकैतों का संघगठन हुआ करता था। इस संघगठन मे लगभग 10 लोग हुआ करते थे और ये डकैत गरीबो को लूटा करते थे। उस समय पर डकैत सिर्फ घोड़ो पर ही आया जाया करते थे क्योकि उस समय मे कार और मोटरसाइकिल जैसी सुविधा बहुत ज्यादा कम थी इसलिए डकैतों की सबसे अच्छी सवारी घोड़े हुआ करती थी क्योकि आप अच्छी तरह से जानते ही होंगे और आपने फिल्मों मे भी ऐसा होता हुआ देखा होगा। उस पर पुलिस भी इतनी ज्यादा सक्रिय नहीं हुआ करती थी इसलिए डकैतों के संघगठन पनप रहे थे।


इन 10 को धन दौलत का इतना मोह था कि यह डकैत किसी हद तक जाने को तैयार रहते थे। इन डकैतों ने सेकड़ों घरों को बर्बाद कर दिया था। सेकड़ों बच्चो को यतीम और सेकड़ों महिलाओ को इन्होने विधवा बना दिया था। ये डकैत अपनी दौलत की भूख के आगे इतने बेरहम हो गए थे कि इनको दौलत के आगे कुछ भी दिखाई नहीं देता था। इनके आगे चाहे बच्चा आ जाए या फिर कोई गर्भवती ये डकैत इन पर भी रहम नहीं दिखाते थे। इन्होने ने सेकड़ों घरों मे आग लगाकर हजारो लोगो का कत्लयाम किया था।


ये डकैत रात के अंधेरे मे गाँव मे घुसकर गरीबो को लूटा करते थे और उन गरीबो के साथ आत्याचार किया करते थे। ये इनका रोजाना का पैसा बन चुका था। ये 10 डकैत दौलत के नशे मे आदमखोर बन चुके थे। ये गरीबो का पैसा लूटकर अपनी शैतानी  भूख को मिटाते थे।

लेकिन दोस्तो पाप का घड़ा एक न एक दिन जरूर ही भरता और बाद मे फूटता भी है ऐसा ही इन 10 डकैतो के साथ भी होने जा रहा था। एक बार इन डकैतों का संघगठन एक गाँव की तरफ उस गाँव को लूटने के लिया रवाना हो जाता है उस समय रात का अंधेरा होता है और ये डकैत उस गाँव मे दाखिल हो जाते है लेकिन क्या देखते है कि इस गाँव मे दूर- दूर तक कोई नजर नहीं आता है केवल एक बुजुर्ग उस गाँव मे खाट पर बैठा हुआ दिखाई देता है। इन डकैतों को आश्चर्य होता है कि ऐसा हमने आज से पहले कभी नहीं देखा कि गाँव मे सिर्फ एक आदमी रहता है वो भी बुजुर्ग। ये सभी डकैत उस बुजुर्ग के पास पहुचे और पूझा की इस गाँव के लोग कहा गए है।

बुजुर्ग को तो पहले से ही पता था कि इस गाँव के लोग कहा गए है लेकिन यह बात उस बुजुर्ग ने उन डकैतो से छिपा ली ताकि उन सभी गाँव वालों की जान बच सके ताकि वह अपने आप को उन डकैतों से अपने बच्चे और परिवार को बचा सके।

वह बुजुर्ग काफी ज्यादा शातिर था और उसकी उम्र 85 साल थी। इस बुजुर्ग ने पहले से ही योजना बना ली थी कि इन डकैतों को ठिकाने कैसे लगाया जाए।

इस योजना के हिसाब से बुजुर्ग ने डकैतो के आने से पहले ही एक पहले सभी गाँव वालों को यह कहकर उस गाँव से भगा दिया था क्योकि उस बुजुर्ग को अंदाजा था कि कभी न कभी इस गाँव मे वह डकैत जरूर ही कदम रखेंगे। योजना के हिसाब से सभी गाँव के परिवार के लोगो को जंगल की और रवाना कर दिया था और अपनी जान की परवा किए बिना यह बुजुर्ग उन डकैतो को ठिकाना लगाना चाहता था।

उस बुजुर्ग ने एक ऐसी खतरनाक योजना बनाई थी कि उन डकैतो को उस योजना मे अपने जाल मे फसाना था और उन डकैतो को जड़ से खत्म करना था। बुजुर्ग की योजना मे था कि उस गाँव से 150 किलो मीटर दूर एक पहाड़ी थी उस पहाड़ी के नीचे एक गुफा थी जो बहुत ही ज्यादा खतरनाक थी। उस बुजुर्ग को पता था कि उस गुफा मे किसी का जाना बेहद ही खतरनाक हो सकता है क्योकि उस गुफा के अंदर 7 खूनी दरवाजे थे जहा पर एक दरवाजे मे एक खूंखार शैतान रहा करता था।

उस गाँव मे बैठे बुजुर्ग से उन डकैतों ने पूझा की इस गाँव के लोग कहा गए है।

बुजुर्ग ने जबाब दिया:- इस गाँव के लोग एक खजाने की तलाश मे गए है जहा पर बहुत सारा सोना, चाँदी, हीरे और मोती छिपे हुए है। बुजुर्ग ये भी कहा कि मे भी उस खजाने को प्राप्त करना चाहता था लेकिन मुझसे इतनी दूर चला नहीं जाएगा।

डकैतों ने उस बुजुर्ग की बातों को सुना और बाद मे बुजुर्ग से कहा क्या ये सही बात है तो बुजुर्ग ने कहा हाँ ये सही बात है तो डकैतो को उस बुजुर्ग की बात पर भरोषा हो गया था जब उनको लगा की बकाई मे वहा पर खजाना छिपा है तो उस बुजुर्ग को वही पर कत्ल कर देते है और सुबह होते ही वह डकैत अपनी मंजिल की और निकल पड़ते है। साथ मे खाने पीने का समान भी ले लेते है ताकि रास्ते मे कुछ खा सके क्योकि 150 किलो मीटर दूर वह पहाड़ी थी जो की वहा पहुचने के लिए दो से तीन तो लगता।

3 दिन के अंतराल मे ये 10 डकैत उस पहाड़ी तक पहुचे। 10 डकैत उस पहाड़ी तक तो आसानी से पहुच तो गए और उस गुफा को तलाशने लगे जहा पर खजाना पड़ा हुआ था। वह सभी डकैत अलग- अलग रस्तों से उस गुफा की तलाश करने लगे। बड़ी मेहनत करने के बाद इनको वह गुफा दिखाई दी जब यह गुफा इनको दिखाई दी तब इन्होने खुशी मे नृत्य करना शुरू कर दिया। अब ये डकैत सोचने लगे थे कि अब हमे ये खजाना मिल गया है और हम सबसे अमीर व्यक्ति बन जाएंगे।

नृत्य कर- कर उस गुफा के अंदर यह 10 डकैत घुस जाते है और उस गुफा के अंदर कुछ दूरी पर जाते है तो उस गुफा मे रात के अंधेरे के तरह नजारा दिखाई दे रहा था। तब इन्होने उस अंधेरे को दूर करने के लिए कुछ वस्तु को जलाकर कर उस गुफा मे प्रकाश किया। जब इस गुफा मे कुछ हद तक अंधेरा जा चुका था तब यह डकैत आगे की और बढ्ने लगे थे। कुछ दूरी पर जाकर इनको 7 दरवाजे दिखाई दिये और ये डकैत हैरान हो गए कि अब क्या किया जाए।

इन 10 डकैतों ने सबसे पहले इन दरवाजों अच्छे से देखा और धीरे- धीरे इन दरवाजो के पास पहुचे। इनको दरवाजो मे दिखा की सभी दरवाजों मे ताले लगे हुये थे। इन डकैतो को दौलत से इतना प्यार था कि इनसे कुछ समय तक रुका भी नहीं जा रहा था। इन्होने पहला दरवाजा का ताला पत्थर मार- मार के तोड़ा और अंदर जाकर देखा लेकिन उस दरवाजे के अंदर इनको कुछ नजर नहीं आया वल्कि वहा पर चिमकागड़े उल्टी लटकी हुई थी। इन्होने उस दरबाजे का अंदर का कमरा सारा तलाशा लेकिन इनको कुछ हाथ नहीं लग पाया।

ऐसे ही करके इन्होने 6 दरबाजे खोल लिए थे लेकिन इनको इन दरबाजों के अंदर भी कुछ नहीं मिला और ये सभी डकैत हार गए और कुछ देर आराम करने लगे। इन 6 दरबाजों को खोलने के लिए इनको 15 घंटे लगे। 15 घंटे बीतने के बाद ये 7 वा दरबाजा भी खोलने जा रहे थे। दिन मे ये सभी गुफा मे घुसे थे और 6 दरबाजों को खोलते- खोलते इनको रात हो गई थी। 7 वा दरबाजा खोलने ही जा रहे थे तब इनको उस दरबाजे के ताले मे कुछ अजीब चीज सी नजर आई। उस दरबाजे के ताले पर कुछ मंत्र तंत्र जैसी कुछ अजीब सा नजर आ रहा था।

इन 10 डकैतों ने उस चीज को नजर अंदाज कर दिया और वह 7 वा दरबाजा का ताला तोड़ने लगे। जैसे ही ताला टूटता है वैसे ही वह उस दरबाजे के अंदर चले जाते है क्योकि इन्हे खजाना पाने की बहुत जल्दी थी। जब अंदर देखते है तो अंदर कुछ भी नहीं दिखता लेकिन एक बहुत बड़ा बक्सा सा पड़ा हुआ दिखाई देता है। ये 10 डकैत वही पर रुक जाते है और आपस मे सलाह मशहूरा करने लगते है और आखिर मे निर्णय करते है इस बक्से के अंदर ही खजाना छिपा होगा अब इसे ही खोलना चाहिए। इन 10 आदमी मे से एक को कहा जाता की इस बक्से को खोलकर देखो ताकि इसमे खजाना छिपा हो तो एक डकैत उस बक्से को खोलने लगता है जब वह बक्सा खोल लेता है तो उसे एक मरा हुआ शैतान दिखाई पड़ता है जो उस बक्से मे सोया हुआ रहता है।

ये 10 के 10 डकैत उस शैतान को देखते है और वहा से जल्दी से भागने की योजना बनाने लगते है उन्हे एहसास हो गया था कि ये शैतान अभी सोया हुया है और कभी भी ये जाग सकता है। अगर ये शैतान जाग गया तो हमे कच्चा ही खा जाएगा ये बहुत तेज़ी से गुफा से बाहर निकलने की कोशिश करते है और आधे रास्ते तक ही पहुचते तब तक वह शैतान इनके सामने हाजिर हो जाता है। वह शैतान इतना भयानक दिखाता है कि कुछ डकैत इसको देखते ही बेहोश हो जाते है और कुछ डकैतों की पतलूम पीले हो जाती है।

ये डकैत भागने की कोशिश तो बहुत करते है लेकिन उस खतरनाक शैतान सामने भाग नहीं पाते है। वह शैतान आखिर मे सबको मार देता है और कच्चा ही खा जाता है जो इन डकैतों ने गरीबो के साथ किया था ऊपर वाले उससे भी बड़ा बदला लिया।

Thursday, January 2, 2020

January 02, 2020

भूतिया रेलवे स्टेशन जब उसने देखा एक सीट पर भूत

यह घटना एक सबिता की है जब उन्होने  देखा ट्रेन मे एक भूत को :- 

This incident is of a sabita when he saw a ghost in the train.





मानस जी के बेटी सबिता, बेंगलुरु में एक सॉफ्टवेयर कंपनी में काम करता था । मानस जी बेटी को देखने के लिए साल में एक दो बार जरूर बेंगलुरु जाते थे । वहां चार-पांच दिन रुक कर, फिर वापस आ जाते थे । उस दिन यशवंतपुर-पूरी गरीब रथ एक्सप्रेस से वह भुबनेश्वर वापस आ रहे थे । ए.सी. बोगियों में ज्यादा समय बिताने का आदत ना होते भी, बेटी हमेशा ए.सी. ट्रेन में टिकट बुक कर देता था । लगभग 30 घंटे का सफर । इतना समय ए.सी. में बिताना मानस जी के लिए बहुत मुश्किल होता था । क्योंकि बिना चादर ओढ़े ऐ.सी. में बैठा नहीं जाता । सोने का समय छोड़कर बाकी समय भी चादर ओढ़ना, यह उनको अच्छा नहीं लगता था । इसीलिए मानस जी हमेशा इधर उधर चलते फिरते रहते थे । कभी अपने सीट पर बैठकर भूत की कहानी पढ़ते थे, तो कभी दरवाजा के पास खड़ा होकर प्राकृतिक सौंदर्य को देख के खुश होते थे । ऐसे भी दक्षिण भारत का प्राकृतिक परिवेश बहुत सुन्दर है ।


ट्रेन की दोनों तरफ पहाड़, नदी, गांव, शहर आदि देखते देखते ट्रेन आंध्र प्रदेश का दुबड़ा स्टेशन में पहुंच गया । उस वक्त समय लगभग रात के 9:30 बज चुका था । मानस जी घर से लाये हुए डिनर भी ख़तम कर चुके थे । पास में बैठे सभी यात्री यों ने भी अपना-अपना डिनर ख़तम करके सोने की तैयारी में थे । मगर मानस जी को नींद नहीं आ रहा था । वह सोचते थे की; और आधा घंटा के बाद ट्रेन विशाखापट्टनम जंक्शन में पहुँच जाएगा । वहां से ट्रेन छूटने के बाद ही जाकर सोएंगे । ऐसे सोचते हुए ट्रेन दुबड़ा स्टेशन से विशाखापट्टनम की और रवाना हुआ ।


उस वक़्त मानस जी दरवाजे के पास खड़े हुए थे । अचानक उनको लगा, जैसे कोई उनके पीछे खड़ा हुआ है | मानस जी थोड़ा घबरा कर पीछे देखें; एक चाय वाला हाथ में एक चाय का बर्तन लेके खड़ा हुआ था । उसको देख के पता चलता था, जैसे कि वह कई दिनों से सोया नहीं है । दुबला पतला चेहरा और आंखें अंदर की ओर चला गया है । वह मानस जी के पास आया और दरवाजा से बाहर की ओर देखने लगा । मानस जी समझ गए की वह शायद अगले स्टेशन में उतरने वाला है । मानस जी ऐसा सोच कर उसको दरवाजा के पास जाने दिए । और खुद दूसरी तरफ का दरवाजा के पास खड़े हो गए । उस वक्त वहां कोई नहीं था । ए.सी. बोगी का दरवाजा भी बंद था । और लगभग सारे यात्रीओ ने सो चुके थे । आहिस्ता आहिस्ता ट्रेन की रफ्तार तेज होने लगा ।


अचानक दूसरे दरवाजे से एक चीख़ सुनाई दिया । मानस जी उस दरवाजे के तरफ देखे; वह चाय वाला वहां नहीं था । उनके सर चक्कर खा गया । दरवाजे के पास जाकर बाहर की ओर नजर घुमाने लगे, लेकिन रात के अंधेरे में कुछ दिखाई नहीं दे रहा था । वह डर के कांपने लगे । क्या सचमुच वह चाय वाला ट्रेन से गिर गया? वह तुरंत बग्गी के अंदर जाकर उस चाय बाले को ढूंढने लगे । लेकिन वहां भी बह नहीं था । अब मानस जी के मन में बहुत सारे सवाल आने लगा । अगर वह चाये बाला गिर गया होगा, तो अभी तक जिंदा नहीं होगा । मानस जी सोचे की बह उनके बग्गी के पास सोये हुए लोगोको बुलाएँगे | लेकिन फिर सोचे; कौन एक अनजान चाय वाले का मदत करने केलिए आएगा? ऐसा सोच के बह चुप रहे | अब मानस जी के मन विचलित होने लगा ।


अब मानस जी को उस दरवाजे के पास जाने को हिम्मत नहीं था । उनके आंखों के सामने उस गरीब चाय बाले का जिंदगी चला गया । मानस जी बिल्कुल गुमसुम होकर बैठ गए । कुछ समय के बाद ट्रेन विशाखापट्टनम जंक्शन में पहुंच गया । कितने लोग ट्रैन के अंदर आये और कितने लोग बाहर गए | वह भी थोड़ा बाहर आकर घूमने फिरने लगे | लेकिन अंदर ही अंदर वह उस चाय बाले को ही ढूंढ रहे थे । मन ही मन सोच रहे थे; जो बह सोच रहे हैं, वो गलत हो जाये | ऐसा करिश्मा होजाये कि बह चाय वाला दूसरी किसी बग्गी से निकल आये ।


विशाखापट्टनम जंक्शन से ट्रेन छोड़ने का संकेत दिया | मानस जी प्लेटफार्म से अपने बैगी में चढ़े । लेकिन वह उस बात को किसी को बता नहीं पा रहे थे । आहिस्ता आहिस्ता ट्रेन प्लेटफार्म से रवाना होने लगा । ठीक उसी वक्त मानस जी देखें की प्लेटफार्म के एक आखिर बेंच पे वही चाय वाला बैठा है । पास में चाय का बर्तन रखा है । उसे देख के मानस जी के मुख मंडल में चमक आ गया, और वह खुशी से बोल उठे; “है भगबान तुम महान हो” | जितना जितना ट्रेन आगे बढ़ रहा था, उतना उतना मानस जी के नजर से वह चाय वाला का चेहरा रात के अँधेरे में छुप रहा था ।


मानस जी उसी चाय बाले को देख रहे थे | उसी समय एक गार्ड आकर बोला: “सर आप दरवाजा बंद कर दीजिए” मानस जी बोले, “ठीक है कर देंगे” उसने फिर बोलै; “तुरंत बंद कर करके अंदर जाइए” | उसके बाद मानस जी दरवाजा बंद कर दिए और हंसते हुए उस गार्ड को बोले; “आप इस सामान्य बात को लेकर इतना गुस्सा क्यों हो?” उस गार्ड ने बोला; “हम आपसे गुस्सा नहीं हो रहे हैं।” बात यह है कि एक चाय वाला ने इसी दरवाजे से गिरकर अपना जान गवा दिया था । अभी रात को वह चाय वाला सबको बड़ा परेशान कर रहा है । आजकल भूत बनकर किसी भी वक़्त आपको चाय देने आ सकता है ।


उस गार्ड के मुँह से इतना सुनकर मानस जी के बोलती बंद हो गई । कुछ बोलने को हिम्मत नहीं हो रहा था, कि उस चाय वाला को बह एक बार नहीं दो दो बार देख चुके हैं । तुरंत मानस जी अपना सीट पर जाकर सो गए । मगर नींद कहां आने बाला है? बार-बार वह चाय बाले का चेहरा मानस जी को दिखाई दे रहा था | तब से वह रात तो क्या दिन में भी दरवाजे के पास खड़े होने की हिम्मत नहीं करते

Wednesday, January 1, 2020

January 01, 2020

दिल्ली के एक गाँव के कुएं का भूत की कहानी

यहाँ घटना दिल्ली के एक गाँव के कुएं का भूत की है :- The incident here is of the ghost of a village well in Delhi.


यह घटना 1999 के आस पास की है। दिल्ली में रहनेवाले हमारे एक दूर के रिश्‍तेदार पहली बार हमारे गांव जगन्पुरा में अपने एक नजदीकी रिश्‍तेदार के घर पर आए। पर वहां उनका मन नहीं लगता था , रिश्‍तेदार अपने व्‍यवसाय में व्‍यस्‍त रहते और उनकी पत्‍नी अपने छोटे छोटे बच्‍चों में। वे वहां किससे और कितनी देर बातें करतें , उनके यहां जाने में जानबूझकर देर करते थे और हमारे यहां बैठकर बातें करते रहते थे । बडे गप्‍पी थे वो , अक्‍सर वे हमारे घर पहुंच जाते थे और घंटे दो घंटे गपशप करने के बाद खाना खाकर ही लौटते थे।


एक दिन शाम को पहुंचे , तो इधर उधर की बात होते होते भूत प्रेत पर जाकर रूक गयी , भूत प्रेत का नाम सुनते ही उन्‍होने अपनी शौर्यगाथाएं सुनानी शुरू की। फलाने जगह में भूत के भय से जाने से लोग डरते हैं , मैं वहां रातभर रहा , फलाने जगह पर ये किया , वो किया और हम सभी उनके हिम्‍मत के आगे नतमस्‍तक थे। मेरी मम्‍मी ने एक दो बार रात के समय इस तरह की बातें न करने की याद भी दिलायी , पर वो नहीं माने ‘नहीं , चाचीजी , भूत प्रेत कुछ होता ही नहीं है , वैसे ही मन का वहम् है ये’ और न जाने कहां कहां के ऐसे वैसे किस्‍से सुनाते ही रहे।

उस दिन खाते पीते कुछ अधिक ही देर हो गयी थी , रात के ग्‍यारह बज गए थे , गांव में काफी सन्‍नाटा हो जाता है। उस घर के छत से आवाज दे देकर बच्‍चे बार बार बुला रहे थे । सामने के रास्‍ते से जाने से कई मोड पड जाने से उनका घर हमारे घर से कुछ दूर पड जाता था , पर खेत से होकर एक शार्टकट रास्‍ता था । हमलोग अक्‍सर उसी रास्‍ते से जाते आते थे , उन्‍होने भी उस दिन उसी रास्‍ते से जाने का निश्‍चय किया। पीछे के दरवाजे से उन्‍हें भेजकर हमलोग दरवाजा बंद करके अंदर अपने अपने कामों में लग गए। अचानक मेरी छोटी बहन के दिमाग में क्‍या आया , छत पर जाकर देखने लगी कि वे उनके घर पहुंचे या नहीं ? अंधेरा काफी था , मेरी बहन को कुछ भी दिखाई नहीं दिया , वह छत से लौटने वाली ही थी कि उसे महसूस हुआ कि कोई दौडकर हमारे बगान में आया और सामने नीम के पेड के नीचे छुप गया।

*   मेरी बहन ने पूछा ‘कौन है ?‘

*   उनकी आवाज आयी ‘मैं हूं’

*   ‘आप चाचाजी के यहां गए नहीं ?’

‘*    खेत में कुएं के पास कोई बैठा हुआ है’

गांव में रात के अंधेरे में चोरों का ही आतंक रहता है , उनकी इस बात को सुनकर हमलोगों को चोर के होने का ही अंदेशा हुआ , जल्‍दी जल्‍दी पिछवाडे का दरवाजा खोला गया। पूछने पर उन्‍होने हमारे अंदेशे को गलत बताते हुए कहा कि वह आदमी नहीं , भूत प्रेत जैसा कुछ है , क्‍यूंकि कुएं के पास उसकी दो लाल लाल आंखे चमक रही हैं। तब जाकर हमलोगों को ध्‍यान आया कि कुएं के पास खेत में पानी पटानेवाला डीजल पंप रखा है और उसमें ही दो लाल बत्तियां जलती हैं। जब उन्‍हें यह बात बताया गया तो उन्‍होने एकदम से झेंपकर कहा ‘ओह ! हम तो उससे डर खा गए’ ।

 बेचारे कर भी क्‍या सकते थे , इस डर खाने की कहानी ने तुरंत बखानी गई उनकी निडरता की कहानियों के पोल को खोल दिया था। फिर थोडी ही देर बाद वे चले गए , और हमारे घर के माहौल की तो पूछिए मत , हमलोगों को तो बस हंसने का एक बहाना मिल गया था।

Tuesday, December 31, 2019

December 31, 2019

यह एक रहस्य मे कहानी है भूतो की अनोखी कहानी


यह एक रहस्य मे कहानी है भूतो की अनोखी कहानी :- This is a mystery story, a unique story of ghosts.




भूत भी कई प्रकार के होते हैं। आज मैं भूतों की जो कहानी सुनाने जा रहा हूँ ओ बुड़ुआओं (एक प्रकार के भूत) के बारे में है। जब कोई व्यक्ति किसी कारण बस पानी में डूबकर मर जाता है तो वह बुड़ुआ बन जाता है। बुड़ुआ बहुत ही खतरनाक होते हैं पर इनका बस केवल पानी में ही चलता है वह भी डूबाहभर (जिसमें कोई डूब सकता हो) पानी में।

हमारे तरफ गाँवों में जब खाटों (खटिया) में बहुत ही खटमल पड़ जाते हैं और खटमलमार दवा डालने के बाद भी वे नहीं मरते तो लोगों के पास इन रक्तचूषक प्राणियों से बचने का बस एक ही रास्ता बचता है और वह यह कि उस खटमली खाट को किसी तालाब, खंता (गड्ढा) आदि में पानी में डूबो दिया जाए। जब वह खटमली खाट 2-3 दिनतक पानी में ही छोड़ दी जाती है तो ये रक्तचूषक प्राणी या तो पानी में डूबकर मर जाते हैं या अपना रास्ता नाप लेते हैं और वह खाट पूरी तरह से खटमल-फ्री हो जाती है।


एकबार की बात है कि हमारे गाँव के ही एक पंडीजी एक गड्ढे (इस गड्ढे का निर्माण चिमनी के लिए ईंट पाथने के कारण हुआ है नहीं तो पहले यह समतल खेत हुआ करता था) में अपनी बँसखट (बाँस की खाट) को खटमल से निजात पाने के लिए डाल आए थे। बरसात के मौसम की अभी शुरुवात होने की वजह से इस गड्ढे में जाँघभर ही पानी था। यह गड्ढा गाँव के बाहर एक ऐसे बड़े बगीचे के पास है जिसमें बहुत सारी झाड़ियाँ उग आई हैं और इसको भयावह बना दी हैं साथ ही साथ यह गड्ढा भी बरसात में चारों ओर से मूँज आदि बड़े खर-पतवारों से ढक जाता है।


दो-तीन दिन के बाद वे पंडीजी अपनी बँसखट (बाँस की खाट) को लाने के लिए उस गड्ढे की ओर बढ़े। लगभग साम के 5 बज रहे थे और कुछ चरवाहे अपने पशुओं को लेकर गाँव की ओर प्रस्थान कर दिए थे पर अभी भी कुछ छोटे बच्चे और एक-दो महिलाएँ उस गड्ढे के पास के बगीचे में बकरियाँ आदि चरा रही थीं।
ऐसी बात नहीं है कि वे पंडीजी बड़े डेराभूत (डरनेवाले) हैं। वे तो बड़े ही निडर और मेहनती व्यक्ति हैं। रात-रात को वे अकेले ही गाँव से दूर अपने खेतों में सोया करते थे, सिंचाई किया करते थे। पर पता नहीं क्यों उस दिन उस पंडीजी के मन में थोड़ा भय व्याप्त था। अभी पहले यह कहानी पूरी कर लेते हैं फिर उस पंडीजी से ही जानने की कोशिश करेंगे कि उस दिन उनके मन में भय क्यों व्याप्त था?


उस गड्ढे के पास पहुँचकर जब पंडीजी अपनी बँसखट (बाँस की खाट) निकालने के लिए पानी में घुसे तो अचानक उनको लगा की कोई उनको पानी के अंदर खींचने की कोशिश कर रहा है पर वे तबतक हाथ में अपनी खाट को उठा चुके थे। अरे यह क्या इसके बाद वे कुछ कर न सके और न चाहते हुए भी थोड़ा और पानी के अंदर खींच लिए गए। अभी वे कुछ सोंचते तभी एक बुड़ुआ चिल्लाया, "अरे! तुम लोग देखते क्या हो टूट पड़ो नहीं तो यह बचकर निकल जाएगा और अब यह अकेले मेरे बस में नहीं आ रहा है।" तबतक एक और बुड़ुआ जो सूअर के रूप में था चिल्लाया, "हम इसको कैसे पकड़े, इसके कंधे से तो जनेऊ झूल रहा है।" इतना सुनते ही जो बुड़ुआ पंडीजी से हाथा-पाई करते हुए उन्हें पानी में खींचकर डूबाने की कोशिश कर रहा था वह फौरन ही हाथ बढ़ाकर उस पंडीजी के जनेऊ (यज्ञोपवीत) को खींचकर तोड़ दिया।



जनेऊ टूटते ही लगभग आधा दरजन बुड़ुआ जो पहले से ही वहाँ मौजूद थे उस पंडीजी पर टूट पड़े। अब पंडीजी की हिम्मत और बल दोनों जवाब देने लगे और बुड़ुआ बीस पड़ गए। बुड़ुआओं ने पंडीजी को और अंदर खींच लिया और उनको लगे वहीं पानी में धाँसने। पंडीजी और बुड़ुआओं के बीच ये जो सीन चल रहा था वह किसी बकरी के चरवाहे बच्चे ने देख लिया और चिल्लाया की बीरेंदर बाबा पानी में डूब रहे हैं। अब सभी बच्चे चिल्लाने लगे तबतक बुड़ुआओं ने पंडीजी (बीरेंदर बाबा) को उल्टाकर के कींचड़ में उनका सर धाँस दिया था और धाँसते ही चले जा रहे थे। पानी के ऊपर अब रह-रहकर पंडीजी (बीरेंदर बाबा) का पैर ही कभी-कभी दिखाई पड़ जाता था।

बच्चों की चिल्लाहट सुनकर तभी हमारे गाँव के श्री नेपाल सिंह वहाँ आ गए और एक-आध बड़े बच्चों के साथ गड्ढे में घुस गए। गड्ढे में घुसकर उन्होंने अचेत पंडीजी (बीरेंदर बाबा) को बाहर निकाला। पंडीजी के मुँह, कान, आँख और सर आदि में पूरी तरह से कीचड़ लगी हुई थी। अबतक आलम यह था कि हमारा लगभग आधा गाँव उस गड्ढे के पास जमा हो गया था। आनन-फानन में उस पंडीजी को नहलाया गया और खाट पर सुलाकर ही घर लाया गया। कुछ लोगों को लग रहा था कि पंडीजी अब बचेंगे नहीं पर अभी भी उनकी सँसरी (साँस) चल रही थी। प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के डाक्टर आ चुके थे और पंडीजी का इलाज शुरु हो गया था। दो-तीन दिन तक पंडीजी (बीरेंदर बाबा) घर में खाट पर ही पड़े रहे और अक-बक बोलते रहे। 15-20 दिन के बाद धीरे-धीरे उनकी हालत में सुधार हुआ पर उनकी निडरता की वजह से उन पर इन दिनों में भूतों का छाया तो रहा पर कोई भूत (बुड़ुआ) उनपर हाबी नहीं हो पाया।


आज अगर कोई उस पंडीजी (बीरेंदर बाबा) से पूछता है कि उस दिन क्या हुआ था तो वे बताते हैं कि दरअसल इस घटना के लगभग एक हप्ते पहले से ही कुछ भूत उनके पीछे पड़ गए थे क्योंकि वे कई बार गाँव से दूर खेत-बगीचे आदि में सुर्ती या कलेवा आदि करते थे तो इन भूतों को नहीं चढ़ाते थे। इस कारण से कुछ भूत उनके पीछे ही लग गए थे जिसकी वजह से वे उन दिनों में थोड़ा डरे-सहमे हुए रहते थे।
पंडीजी आगे बताते हैं कि जो बुड़ुआ पहले उनको पकड़ा वह गुलाब (हमारे गाँव का ही एक ब्राह्मण कुमार जो एक बड़े पोखर में डूबकर मर गया था) था क्योंकि दूसरे किसी भी बुड़ुवे में मेरा जनेऊ तोड़ने की हिम्मत तो दूर पास आने की भी हिम्मत नहीं थी पर जब गुलाब (ब्राह्मण बुड़ुए का नाम) ने जनेऊ तोड़ दिया तो सभी बुड़ुओं ने हमला बोलकर मुझे धाँस दिया।

Monday, December 30, 2019

December 30, 2019

भानगढ़ का किला भारत की सबसे डरावनी जगहों में से एक है

आखिर किसलिए लोग भानगढ़ के किले मे जाने से डरते है । Why are people afraid to go to the fort of Bhangarh.




राजस्थान के जयपुर और अलवर के बीच पड़ने वाला भानगढ़ का किला भारत की सबसे डरावनी जगहों में से एक माभानगढ़ का किला भारत की सबसे डरावनी जगहों में से नी जाती है, इस जगह के बारे में लोगो का कहना है की रात के 12 बजे के बाद यहाँ पर भूतो का डेरा लगता है, और यहाँ पर कोई भी रात नहीं गुजार सकता क्योंकि जो भी यहाँ पर रात के वक्त रुकता है सुबह उसकी मौत हो जाती है, भानगढ़ के इस किले के उपर कई सारी टीवी सीरियल बन चुके हैं.



लोगो के मुताबिक 16वीं शताब्दी भानगढ़ में रहने वाला एक तांत्रिक जो की सिंघिया के नाम से जाना जाता था, उसको भानगढ़ की खूबसूरत राजकुमारी रत्नावती के साथ प्रेम हो गया था.


तांत्रिक किसी भी हालत में राजकुमारी को पाना चाहता था, पर वो कुछ नहीं कर सकता था, लेकिन एक दिन राजकुमारी की सहेली उनके लिए बाज़ार से केश-तेल लेने गयी जब वो तेल लेकर लौट रही थी तभी तांत्रिक ने उसमें काला-जादू कर दिया, ताकि राजकुमारी उसे लगाते ही भागी-भागी उसके पास आ जाये.


पर राजकुमारी को उसके टोटके के बारे में पता चल गया. राजकुमारी ने तेल ज़मीन पर गिरा दिया. कहते हैं तेल गिरते ही पत्थर के गोले में बदल गया और लुढकते हुए तांत्रिक की तरफ बढ़ा और उसे कुचल कर रख दिया. तांत्रिक इस बात से क्रोधित हो उठा उअर उसने मरते-मरते एक श्राप दिया कि भानगढ़ पूरा तबाह हो जाएगा और मरने वालों को मुक्ति नहीं मिलेगी….जल्द ही उसका श्राप सच साबित हुआ और भानगढ़ किला खण्डहरों में तब्दील हो गया.


आज भी लोगो का मानना है की यहाँ पर जो भी लोग मरे थे उन सबकी आत्मा ये यहाँ पर भटक रही है, और कई लोगो की यहाँ पर रात के वक्त मौत भी हो गयी है. जिसकी वजह से यहाँ पर भारतीय पुरातत्व विभाग ने बोर्ड भी लगा रखा है की शाम होने के बाद और सुबह होने से पहले इस किले में प्रवेश वर्जित है.

Sunday, December 29, 2019

December 29, 2019

एक लड़की की भटकती आत्मा यहा घटना पोरबंदर की है

एक लड़की की भटकती आत्मा, यह घटना पोरबंदर की है। The wandering soul of a girl, this incident is of Porbandar.


  यह सत्य घटना जो सोनल नाम की एक लड़की की है :-



यह घटना पोरबंदर की है। यह सत्य घटना सोनल नाम की एक लड़की की है। सोनल एक मध्यम वर्गीय परिवार में जन्मी और पली बढ़ी। अपने स्कूल के दिनो में सोनल काफी होशियार छात्रा रही। घर में माता पिता की हर बात मानना और घर-परिवार के काम काज में हाथ बटाना सोनल का स्वभाव था।


जब सोनल 12वी कक्षा में थी तब एक दिन अपनी सहेली के साथ पोरबंदर के समंदर किनारे घूमने गयी, समंदर किनारे दोनों सहेलियाँ पानी में पैर भिगोने और बाते करने में मस्त थीं। तभी अचानक समंदर की और से तेज हवा का झोंका सोनल की और आया और पलक जपकते ही वह हवा का झोंका जैसे उसके शरीर से आर-पार हो कर गुज़र गया। इस घटना से सोनल बुरी तरह डर गई, क्योंकि सोनल को उस हवा के झोंके के साथ हु-बहू अपने जैसी दिखने वाली लड़की भी दिखी थी, जो सोनल के शरीर के साथ टकरा कर सोनल के शरीर से आर-पार निकल गयी थी। उस वांकये के बाद सोनल की ज़िंदगी ही बदल गयी।

खाते पीते, सोते जागते, दिन, रात, सुबह शाम, सोनल को वह लड़की नज़र आने लगी। अपने जैसी दिखने वाली लड़की को देख कर सोनल खूब घबरा जाती, रोने लगती, और कई बार डर के मारे बीमार भी पड़ जाती। परिवार ने सोनल की तकलीफ दूर करने के लिए लाख जतन किए, पूजापाठ, हवन, दान धर्म, और अन्य कई सारे इलाज किए। पर कोई मरहम सोनल के काम ना आसका।

हद्द तो तब हो गयी जब सोनल अपने कॉलेज की पढ़ाई कर रही थी। शहर के कॉलेज के प्रोफ़ेसोर ऐसे कॉमेंट पास करने लगे थे के यह तो उसकी हूबहू कॉपी है। और सोनल को देख कर ऐसे अचंभित होने लगते के जेसे पुराना पाप सामने आने पर कोई पापी अचंभित हो जाता हो।

ऐसा कहा जाता है के आज से 35-40 साल पहले उसी कॉलेज में एक लड़की पढ़ती थी। और वह अचानक गायब हो गयी थी। माना जाता है कि कॉलेज प्रशासन से जुड़े कुछ लोगों ने उस कड़की को अगवाह कर के उसका बलात्कार कर के उसे मार दिया था। और उसके शरीर के कुछ टुकड़े कॉलेज की जमीन में दफना दिये थे। और कुछ समंदर किनारे फेंक दिये थे।

उसी लड़की की आत्मा सोनल को दिखती रहती है। और अपने लिए इंसाफ चाहती है। सोनल आज भी अपने जीवन में कभी कभी उस लड़की की परछाई देखने का अनुभव करती हैं। पर अब सोनल ने अपने डर का सामना करना सीख लिया है। और इस बात को समझ लिया है, कि अगर हकीकत में ऐसी कोई दुखदाई घटना उस लड़की के साथ हुई होगी, तो समय आने पर उस राज से परदा उठेगा। और दोषियों को सजा मिलेगी।
December 29, 2019

मुंबई की एक इमारत, जहा मौत करती है इन्सान का पीछा


मुंबई की एक इमारत, जहा मौत करती है इन्सान का पीछा :- A building in Mumbai, where death kills humans.



यहाँ एक सच्ची घाट है जो मुंबई एक इमारत में हुआ :- 





 मित्रो हमने अक्सर सुना है कि कभी कभी कोई घर या इमारत में कुछ ऐसे हादसे होते है जिसका पता नहीं लग पाता | कि उसको किसी प्रेत ने जकड़ रखा है या ये सब प्राकुतिक घटनाए है | हम अपने नए घर में प्रवेश से पहले इन्ही दुरात्माओ से बचने के लिए हवन यज्ञ करवाते है | आज हम आपको ऐसी ही एक इमारत के बारे में बतायेगे जहा मौत करती है इंसान का पीछा |





भारत की आर्थिक राजधानी के रूप में मशहूर मुंबई में ग्रांड पैराडी टॉवर Grand Paradi Tower Mumbai Haunted नाम की इमारत है इसका निर्माण 1976 में हुआ था | तब से लेकर आज तक यहा 20 से भी ज्यादा आत्महत्याओं के मामले सामने आये है | जिसने इस इमारत में रहने वाले वाशिंदों को दहशत में डाल रखा है | अधिकतर आत्महत्या के मामले इमारत की छत या खिड़की से कूदकर होने के सामने आये है | इन घटनाओ को ना केवल इन्टरनेट पर बल्कि देश के बड़े अखबारों में इस इमारत के बारे में बताया गया है | इन सारी घटनाओं की सच्चाई अभी तक कोई नहीं जान पाया इसलिए यहा होने वाली घटनाए लोगो के लिए एक रहस्य बना हुआ है |




 इन सब कारणों से इस इमारत को भारत की दस प्रेतबाधित स्थानों में से एक गिना जाता है | हमारे लिए ये सोचने की बात है कि अगर आत्महत्या का कोई कारण नहीं मिलता है तो क्या इस इमारत में कोई प्रेत का कब्ज़ा है जो यहा के निवासियों को मौत के घाट उतारता है | हमने अक्सर देखा या सुना होगा कि अगर किसी घर में प्रेत का वास हो वहा कोई इन्सान नहीं रह पाता | यहा की 8वी मंजिल पर अधिकतर इन घटनाओं का अंजाम होता है जो कि बड़ी अजीब तरीके से मौत के मामले सामने आये है| 2004 में एक बुजुर्ग दम्पति इस इमारत की खिड़की से कूद गए थे तब से यहा मौत का सिलसिला चालु हो गया |



उसके कुछ दिनों बाद उसके बच्चे और पोते भी उसी तरह इमारत से कूद गए | इसके बाद हर साल कोई ना कोई मामला सामने आता है | इसके लिए वहा के निवासियों ने यज्ञ हवन करवाया जिससे यहा मौत पर कुछ विराम तो लगा लेकिन आज भी उसकी 8वी मंजिल पर जाने से लोग कतराते है।